Friday, May 08, 2015

आरटीआई में जानकारी मत मांगो, जुर्माना ले लो, अफसर भर चुके जुर्माना

दैनिक भास्कर: भोपाल: Friday, 08 May 2015.
सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी देने से बचने के लिए अधिकारी पहले तो बहाने बनाते हैं। जब बात नहीं बनती तो जुर्माना देकर बात टाल देते हैं। आरटीआई के मामलों में हीलाहवाली करने वाले प्रदेश में 45 अधिकारियों ने 6,74,750 रुपए जुर्माना भरा है। सूचना आयोग की जुर्माना वाली सूची पर नजर दौड़ाएं तो पता चला कि ग्रामीण एवं पंचायत विभाग के अफसर जुर्माना अदा करने वालों में सबसे ऊपर हैं।
आरटीआई के तहत आवेदकों को निर्धारित समय में जानकारी नहीं देने और आयोग के निर्देशों की अवहेलना करने वाले 45 अधिकारियों ने सूचना आयोग में आर्थिक दंड जमा किया है। कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। 45 में से 22 मामले तो ग्रामीण एवं पंचायत विभाग के है। दूसरे नंबर पर नगरीय एवं प्रशासन विभाग के 4 लोक सूचना अधिकारी हैं। यह जुर्माना 6250 से लेकर 25000 हजार तक का लगाया गया है।
बहाने कैसे-कैसे:
आयोग में हर माह तकरीबन 250 प्रकरण पहुंचते हैं। इनमें 15 प्रकरण ऐसे होते है जिसमें लोक सूचना अधिकारी और अपीलीय अधिकारी आयोग के सामने संबंधित सूचना से संबंधित दस्तावेज गुम जाने, फाइल न मिलने, और फाइल चोरी हो जाने का बहाना बनाते हैं।
केस-1 25 हजार का जुर्माना:
आरटीआई एक्ट के तहत जानकारी न देने पर मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लोक सूचना अधिकारी जीके जैस को 25 हजार का जुर्माना देना पड़ा। इस मामले में अपीलीय अधिकारी वीके सिंह को सूचना देने में बाधा पहुंचने पर जुर्माने का नोटिस और प्रयत्न संस्था के अजय दुबे को डेढ़ हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए।
केस-2 - ट्रेन में चोरी हो गई फाइल:
रीवा जिला पंचायत के सीईओ से कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण देने वाली अग्रणी सामाजिक संस्था से संबंधित दस्तावेज संबंधी जानकारी मांगी थी। तत्कालीन सीईओ निशांत वरवड़े ने समय सीमा में सूचना नहीं दी। तब आयोग ने जुर्माने का नोटिस जारी किया। इस पर वरवड़े ने बताया कि ट्रेन में फाइल चोरी हो गई।
कार्रवाई के लिए निर्देश:
सूचना आयोग ने दो अधिकारियों पर जुर्माना न लगाकर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की निर्देश दिए हैं। इसमें ग्रामीण एवं पंचायत विभाग के मिथलेश उद्दे और दुर्गाशंकर बनकर शामिल हैं।
सूचना देना अनिवार्य है:
अधिकारी यह सोचते हैं कि फाइल गुमने की बात कहने से प्रकरण नस्तीबद्ध हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं है। गुमी हुई फाइल के वैकल्पिक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध होते हैं। लोक अपीलीय अधिकारी व अपीलीय अधिकारी को उन दस्तावेजों के आधार पर सूचना उपलब्ध करना अनिवार्य है। हीरालाल त्रिवेदी, आयुक्त, राज्य सूचना आयोग