दैनिक
जागरण: नई
दिल्ली, 11 August 2014.
व्यक्ति
के जीवन में कभी ऐसे भी क्षण आते हैं जब उसके साथ घटित कोई घटना उसके जीवन पर गहरा
असर कर जाती है। ऐसी ही एक घटना ने त्रिलोकपुरी निवासी जीशान हैदर के जीवन का मकसद
बदल दिया। छोटे-छोटे काम के लिए महीनों विभागों के चक्कर काटना और अधिकारियों से
पूछने पर उनके गुस्से का शिकार होना,
जीशान को मानसिक रूप से
परेशान भी कर रहा था और ऐसी व्यवस्था के खिलाफ कुछ करने के लिए अंदर से प्रेरित भी
कर रहा था। जीशान आरटीआइ कार्यकर्ता हैं और आरटीआइ के जरिए विभागों में फैले
भ्रष्टाचार को उजागर करने के साथ ही लोगों की मदद भी करते हैं।
वह
बताते हैं कि पूर्वी दिल्ली के हिम्मत पुरी डाक घर में कर्मचारियों की कमी थी और
वहां एक भी कंप्यूटर नहीं था। ऐसे में वहां जाने वाले लोगों को काफी परेशानी होती
थी। उन्होंने मामले में संबंधित अधिकारियों से शिकायत की और सूचना के आधार के तहत
डाक देरी से पहुंचने का कारण पूछा। जिसके बाद डाक घर को कंप्यूटरीकृत कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि एक सिपाही से बातचीत में पता चला कि उनके पास जूते तक नहीं होते
हैं। इसके बाद दिल्ली पुलिस विभाग में आरटीआइ डालकर पुलिसकर्मियों को मिलने वाले
सामान की जानकारी मांगी तो पुलिसकर्मियों को जूते व अन्य सामान तुरंत मिल गए।
जीशान
कहते हैं कि मेरे पास जो भी आदमी अपनी परेशानी लेकर आता है मैं उसकी परेशानी दूर
करने के लिए आरटीआइ का सहारा लेता हूं। जिसके बाद काफी हद तक लोगों की परेशानी दूर
हो जाती है। उन्होंने बताया कि लोगों की मदद करने या आरटीआइ लगाने पर कई बार धमकी
मिल चुकी है या फिर पैसे का प्रलोभन दिया गया है।
उन्होंने
कहा कि निगम स्कूलों में शिक्षकों की कमी व मिड-डे मील में हो रही धांधली के खिलाफ
मैंने आवाज उठाई। क्योंकि बच्चों को न तो ठीक शिक्षा ही मिल पा रही है और न ही
दोपहर में अच्छा खाना ही उन्हें दिया जा रहा है। अभी तक वह जनहित में अलग-अलग
विभाग में करीब तीन सौ आरटीआइ डाल चुके हैं।