Sunday, September 25, 2011

नियुक्तियों पर सरकार मौन क्यों ?

Patrika.com:Sunday,25 September 2011.
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि राज्य सूचना आयोग में नियुक्तियों पर वह मौन क्यों है? सात महीने बाद भी राज्य सरकार द्वारा जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि जवाब पेश करने के लिए और कितना समय चाहिए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुशील हरकोली एवं जस्टिस केके त्रिवेदी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को हर हाल में दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है।
आरटीआई कार्यकर्ता नित्यानंद मिश्रा ने फरवरी में एक जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सूचना आयोग में लम्बित अपीलों का निराकरण नियत समय पर नहीं हो रहा है। याचिका में कहा गया कि आयोग में स्टाफ की कमी है।
याचिका में बताया गया कि आयोग में अब तक 15 हजार अपीलें दायर हुईं जिनमें से करीब आठ हजार लम्बित हैं। इसी तरह वर्ष 2010 तक कुल 4620 शिकायतों में से केवल 2024 का ही निराकरण किया गया। मप्र सूचना का अधिकार फीस व अपील नियम 8 (3) के तहत अधिकतम 180 दिन में अपील का निराकरण करना अनिवार्य है।
याचिका में कहा गया कि आयोग के समक्ष लंबित प्रकरणों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण सूचना आयुक्तों व अन्य कर्मचारियों के रिक्त पड़े पद हैं। आरटीआई कानून की धारा 15 (2) की मंशा के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त के साथ 10 अन्य आयुक्तों की नियुक्ति की जा सकती है। मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के अतिरिक्त मात्र दो अन्य आयुक्त कार्यरत हैं। अतिरिक्त सचिव, उप सचिव का पद भी एक साल से खाली है।
इसके अलावा आयोग में 22 प्रतिशत कर्मचारियों के पद भी खाली हैं। उत्तर प्रदेश और पंजाब में भी मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा दस आयुक्त कार्यरत हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रमोद पांडे ने पैरवी की।
गड़बड़ी पर नोटिस:
मप्र हाईकोर्ट ने संविदा शिक्षकों की नियुक्तियों में गड़बड़ी के मामले में राज्य सरकार, सतना के जिला एवं जनपद पंचायत सीईओ तथा शिक्षक मीरा सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मझगंवा के राम श्री ने याचिका दायर कर बताया कि 20 पदों पर नियुक्ति हुई थी। बाद में शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच में गड़बडियां पाई गईं और कलेक्टर ने नियुक्तियां निरस्त कर दी। शिक्षकों ने अतिरिक्त आयुक्त के समक्ष अपील दायर की, जिन्होंने कलेक्टर के आदेश पर रोक लगा दी। याचिका में बताया गया कि संपूर्ण प्रक्रिया में बहुत सी अनियमितताएं हैं।

भर्ती कमेटी में बीईओ एचएन सिंह भी थे और उनकी लड़की मीरा को भी नियुक्ति दी गई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अनावेदकों से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि शिक्षकों का संविलियन कर दिया है, तो वह याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डीके दीक्षित ने पैरवी की।