याहू! जागरण:Sunday,25 September 2011.
रामगढ़ : देवघर व गिरिडीह के बाद अब रामगढ़ जिले में भी बड़े पैमाने पर जमीन घोटाले की गंध मिली है। घोटाला जमीन से संबंधित सरकारी अभिलेख रजिस्टर टू में छेड़छाड़ कर की गई है। डीसी गणेश प्रसाद ने इसकी जांच का आदेश दिया है। जांच एसी (अपरसमाहर्ता) की देखरेख में होगी। जांच का जिम्मा सभी अंचलाधिकारियों को सौंपा गया है। जांच आदेश के बाद जिले के भू माफियाओं सहित कई अधिकारियों व कर्मियों के भी हाथ पांव फूलने लगे हैं।
क्या है मामला :
जिला बनते ही गैरमजरूआ आम व खास जमीन पर दावे मांडू, पतरातू व रामगढ़ अंचल में किए जाने लगे। जिले व अंचल में नए पदस्थापित अधिकारियों के समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब क्या चल रहा है। यह था भू माफिया व संबंधित अंचल के कुछ कर्मियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल।
तीन साल तक जिले में पड़ा रहा रजिस्टर टू :
मांडू व पतरातू अंचल की जमीन से संबंधित अंचल का मुख्य रिकार्ड रजिस्टर टू सुनियोजित तरीके से तीन सालों तक जिला मुख्यालय में रोक रखा गया। जबकि इसे संबंधित अंचलों में होना चाहिए था। जानकार बताते हैं कि रजिस्टर टू तत्कालीन उपायुक्त अरुण कुमार सिन्हा के कार्यकाल में जिले में मंगाए गए थे। इसके बाद वर्ष 2008 से लेकर वर्ष 2011 तक जिला कार्यालय में ही पड़े रहे। खोज शुरू होने पर इसी वर्ष मई में दोनों अंचलों को रजिस्टर टू लौटाया गया। अंचल कार्यालय में जब रजिस्टर टू वापस पहुंचा तो यह आशंका जाहिर की गई कि इसमें बहुत ज्यादा छेड़छाड़ की गई है। रजिस्टर टू के कई वॉल्यूम व पन्नों को ही बदल दिया गया है।
सबसे अधिक लगाई गई आरटीआई:
रजिस्टर टू जब तक जिला मुख्यालय में रहा, उस दौरान सबसे अधिक सूचना के अधिकार के तहत जमीन से संबंधित जानकारियां मांगी गई। इसके बाद जब रजिस्टर टू वापस अंचल लौटा तो इसी सूचना के अधिकार के तहत अंचलों में यह आवेदन दिया गया कि जिले से मिली जानकारी के अनुसार हमारा रिकार्ड रजिस्टर टू में दर्ज है या नहीं। जब अभिलेख की जांच हुई तो शक यकीन में बदला कि माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए रजिस्टर टू में छेड़छाड़ हुई है।