Sunday, July 26, 2026

कपूरथला नगर निगम PIO के जमानती वारंट जारी:राज्य सूचना आयोग का सख्त आदेश; RTI की जानकारी नहीं देने का आरोप

Dainik Bhaskar: Kapurthala: Sunday, 26 July 2026.
पंजाब राज्य सूचना आयोग (PSIC) ने कपूरथला नगर निगम के जन सूचना अधिकारी (PIO) सह एक्सईएन हरप्रीत सिंह के खिलाफ 7 अलग-अलग मामलों में जमानती वारंट जारी किए हैं। यह कार्रवाई कथित अतिक्रमण और जुलाई 2022 में नाले में गिरकर एक बच्चे की मौत से जुड़ी आरटीआई जानकारी देने में लगातार टालमटोल करने के कारण की गई है।

ह्यूमन राइट्स प्रेस क्लब के लीगल एडवाइजर टीएस ढिल्लो।

राज्य सूचना आयुक्त पूजा गुप्ता की अदालत ने निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा संज्ञान लिया। ह्यूमन राइट्स प्रेस क्लब पंजाब के अध्यक्ष ने सितंबर
2023 में नगर निगम कपूरथला से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं। इनमें शहर में अनियंत्रित अवैध अतिक्रमणों की स्थिति और जुलाई 2022 में एक मासूम बच्चे की खुले नाले में गिरकर हुई मौत की जांच व लापरवाही से संबंधित सवाल शामिल थे।
सितंबर 2023 में आरटीआई दाखिल करने के बावजूद नगर निगम ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद संस्था ने प्रथम अपीलीय अथॉरिटी यानी नगर निगम कमिश्नर के समक्ष अपील दायर की, लेकिन वहां से भी कोई राहत या जानकारी नहीं मिली।
12 अपीलें राज्य सूचना आयोग में लंबित
अधिकारियों की इस लापरवाही और सूचना छिपाने की मंशा के खिलाफ संस्था ने राज्य सूचना आयोग, चंडीगढ़ का रुख किया। संस्था के अध्यक्ष की ओर से कुल 12 अपीलें राज्य सूचना आयोग में लंबित हैं, जिनमें से सूचना आयुक्त पूजा गुप्ता की अदालत में विचाराधीन 7 अपीलों में सीनियर एक्सईएन हरप्रीत सिंह के जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया गया है। आयोग ने सभी सातों अपीलों पर कड़ा रुख अपनाया है।
संस्था के लीगल एडवाइजर क्या कहते है
ह्यूमन राइट्स प्रेस क्लब के लीगल एडवाइज़र TS ढिल्लो ने कहा कि "नगर निगम कपूरथला के अधिकारियों की लापरवाही के कारण शहर में अतिक्रमण का जाल बिछ चुका है और एक मासूम बच्चे को अपनी जान तक गंवानी पड़ी।
जब संस्था के अध्यक्ष जी की तरफ से कानून के दायरे में आकर सवाल पूछे गए तो तीन साल तक फाइलें दबाई गईं और आयोग में भी तारीख पर तारीख का खेल खेला गया। संस्था की तरफ से दायर कुल 12 अपीलों में से मानयोग कमिश्नर पूजा गुप्ता की कोर्ट में चल रही 7 अपीलों में जमानती वारंट जारी होना यह साबित करता है कि अधिकारी कानून से ऊपर नहीं हैं और उन्हें जनता के प्रति जवाबदेह होना ही पड़ेगा।"