Monday, July 27, 2026

दिव्यांग ग्राहकों के लिए बैंकिंग अब भी चुनौती, आरटीआई में खुलासा- न ब्रेल साइनेज, न आरक्षित पार्किंग, कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी नहीं दिया

Dainik Bhaskar: Udaipur: Monday, 27 July 2026.
बैंक में प्रवेश सामान्य ग्राहक के लिए आसान हो सकता है, लेकिन व्हीलचेयर उपयोगकर्ता, दृष्टिबाधित और चलने-फिरने में असमर्थ दिव्यांगजन के लिए यही प्रक्रिया कई बाधाओं और दूसरों पर निर्भरता से भरी होती है।
पंजाब नेशनल बैंक की उदयपुर शाखाओं में दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए दायर
11 आरटीआई के जवाब ने बैंकिंग सुगम्यता की अधूरी तस्वीर सामने रखी है। पैनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के संस्थापक एवं अध्यक्ष, दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता तथा अर्थ डायग्नोस्टिक्स के सीईओ डॉ. अरविंदर सिंह की ओर से दायर आरटीआई के अनुसार, पीएनबी के उदयपुर मंडल में 51 और शहर में 13 शाखाएं हैं। बैंक ने सभी 51 शाखाओं में रैंप या व्हीलचेयर से प्रवेश की सुविधा होने की जानकारी दी है, लेकिन एक भी शाखा को पूर्णतः सुगम या सभी प्रकार के दिव्यांगजनों के अनुकूल नहीं माना गया है। आरटीआई में खुलासा हुआ कि मंडल की किसी भी शाखा में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पार्किंग और ब्रेल साइनेज नहीं हैं। कर्मचारियों को दिव्यांग ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप सहायता और संवेदनशील व्यवहार का कोई विशेष प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। उदयपुर जिले की शाखाओं का अब तक औपचारिक एक्सेसिबिलिटी ऑडिट नहीं हुआ है। पिछले पांच वर्षों में सुगम्यता सुधार पर हुए खर्च की शाखावार जानकारी भी बैंक के पास उपलब्ध नहीं है।
बैंक ने अपने जवाब में ब्रेल साइनेज और आरक्षित पार्किंग जैसी सुविधाओं के अभाव को स्वीकार करते हुए इन्हें उपलब्ध कराने के प्रयास की बात कही है। सकारात्मक पहलू यह है कि दिव्यांग ग्राहकों की शिकायतों के निस्तारण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। हालांकि, डॉ. सिंह का कहना है कि यह व्यापक सुगम्यता की दिशा में केवल शुरुआती कदम है।
रैंप बना देने से शाखा सुगम नहीं हो जाती, हर चरण पर हो सुगमता
डॉ. सिंह ने कहा कि केवल रैंप बना देने से शाखा सुगम नहीं हो जाती। दृष्टिबाधित ग्राहकों के लिए ब्रेल साइनेज, ऑडियो मार्गदर्शन और सुलभ डिजिटल व्यवस्था, व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए आरक्षित पार्किंग, बाधारहित प्रवेश, सुविधाजनक सेवा काउंटर तथा प्रशिक्षित और संवेदनशील कर्मचारी भी जरूरी हैं। बैंकिंग सुगम्यता का अर्थ केवल भवन में प्रवेश नहीं, बल्कि टोकन लेने, प्रपत्र भरने, दस्तावेज समझने, एटीएम उपयोग करने और पूरी बैंकिंग प्रक्रिया तक स्वतंत्र एवं सम्मानजनक पहुंच सुनिश्चित करना है। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि दिव्यांग ग्राहक को हर चरण में किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर न रहना पड़े।
डॉ. सिंह ने पंजाब नेशनल बैंक से सभी शाखाओं का विशेषज्ञों से समयबद्ध एक्सेसिबिलिटी ऑडिट कराने, शाखावार कमियां चिह्नित कर सुधार की कार्ययोजना और बजट तय करने तथा ऑडिट व अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कर्मचारी प्रशिक्षण, ब्रेल व स्पष्ट संकेतक, ऑडियो सहायता, टैक्टाइल सुविधाएं, आरक्षित पार्किंग और सुलभ शिकायत निवारण व्यवस्था को प्राथमिकता देने का भी आग्रह किया।
उनका कहना है कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप सुगम बैंकिंग सहानुभूति या अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों की समानता, स्वतंत्रता, गरिमा और वित्तीय सेवाओं में पूर्ण भागीदारी से जुड़ा संवैधानिक एवं कानूनी अधिकार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पंजाब नेशनल बैंक इन आरटीआई निष्कर्षों को सुधार के अवसर के रूप में लेकर उदयपुर मंडल की शाखाओं को वास्तविक अर्थों में समावेशी और दिव्यांगजन-अनुकूल बनाने के लिए ठोस व समयबद्ध कदम उठाएगा।