Dainik Bhaskar: Datia: Monday, 18 May 2026.
दतिया में महिला एवं बाल
विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) अरविंद उपाध्याय के खिलाफ कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े
ने सख्त कदम उठाया है। आरटीआई के जवाब में 1.66 लाख रुपए मांगने और कार्यालय में अधिवक्ता के सामने
अपनी ही कॉलर पकड़कर अशोभनीय व्यवहार करने के मामले में उन्हें कारण बताओ नोटिस
जारी किया गया है। प्रशासन ने उनकी एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने की चेतावनी भी दी
है।
यह पूरा विवाद एक आरटीआई (RTI) आवेदन से शुरू हुआ। अधिवक्ता शंभू गोस्वामी ने विभाग से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति, उनकी चयन प्रक्रिया और वेतन आहरण से संबंधित दस्तावेज मांगे थे। जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय, विभाग ने उन्हें 1.66 लाख रुपए जमा करने का फरमान (नोटिस) थमा दिया।
कैश लेकर पहुंचे तो किया हाई-वोल्टेज ड्रामा जब अधिवक्ता ने यह जानकारी चाही कि इतनी बड़ी राशि किस मद या खाते में जमा करनी है, तो विभागीय अधिकारी टालमटोल करने लगे। इसके बाद 11 मई को जब अधिवक्ता खुद नकद राशि लेकर कार्यालय पहुंचे, तो स्थिति बिगड़ गई। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें डीपीओ अरविंद उपाध्याय बेहद उत्तेजित नजर आ रहे हैं। वीडियो में अधिकारी अपनी ही कॉलर पकड़कर अधिवक्ता को उकसाते हुए कह रहे हैं- 'मारो झापड़, मारो मुझे।'
कलेक्टर ने माना गंभीर
कदाचरण, जांच कमेटी गठित कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने
एक जिम्मेदार राजपत्रित अधिकारी के इस तरह के बर्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है।
उन्होंने इसे शासकीय मर्यादा के खिलाफ, अनुशासनहीनता और सरकारी कार्यालय की गरिमा को ठेस
पहुंचाने वाला मानते हुए गंभीर कदाचरण की श्रेणी में रखा है।
इस पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए कलेक्टर ने एक दो सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। इस जांच कमेटी में संयुक्त कलेक्टर श्रुति अग्रवाल और तहसीलदार अमित दुबे को शामिल किया गया है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
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शोभनीय व्यवहार करने के
मामले में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। |
यह पूरा विवाद एक आरटीआई (RTI) आवेदन से शुरू हुआ। अधिवक्ता शंभू गोस्वामी ने विभाग से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति, उनकी चयन प्रक्रिया और वेतन आहरण से संबंधित दस्तावेज मांगे थे। जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय, विभाग ने उन्हें 1.66 लाख रुपए जमा करने का फरमान (नोटिस) थमा दिया।
कैश लेकर पहुंचे तो किया हाई-वोल्टेज ड्रामा जब अधिवक्ता ने यह जानकारी चाही कि इतनी बड़ी राशि किस मद या खाते में जमा करनी है, तो विभागीय अधिकारी टालमटोल करने लगे। इसके बाद 11 मई को जब अधिवक्ता खुद नकद राशि लेकर कार्यालय पहुंचे, तो स्थिति बिगड़ गई। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें डीपीओ अरविंद उपाध्याय बेहद उत्तेजित नजर आ रहे हैं। वीडियो में अधिकारी अपनी ही कॉलर पकड़कर अधिवक्ता को उकसाते हुए कह रहे हैं- 'मारो झापड़, मारो मुझे।'
इस पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए कलेक्टर ने एक दो सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। इस जांच कमेटी में संयुक्त कलेक्टर श्रुति अग्रवाल और तहसीलदार अमित दुबे को शामिल किया गया है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
