Patrika: Jaipur: Monday, June 22, 2015.
राज्य
सरकार को 10 साल में सूचना की कीमत के रूप
में करीब पौने दो करोड़ रूपए मिले,
लेकिन सूचना देने में
देरी या आधी-अधूरी सूचना देने पर राज्य सूचना आयोग अधिकारियों पर अब तक करीब सवा
दो करोड़ रूपए जुर्माना लगा चुका है। यह बात अलग है कि देरी के कारण सरकार को इसकी
सूचना मुफ्त में देनी पड़ी।
आमजन
को तो सूचना का अधिकार कानून का लाभ 12 अक्टूबर 2005 से मिलने लगा,
लेकिन यह लागू 15 जून 2005 को ही हो गया था। इसके लागू
होने की अधिसूचना आज से ठीक दस साल पहले 21 जून 2005 को जारी हुई थी। आज भी लोगों को सूचना आसानी से समय
पर नहीं मिलती। इसके बावजूद राज्य में सूचना मांगने वालों की संख्या लगातार बढ़
रही है। लोगों में जागरूकता के कारण राज्य सूचना आयोग में अपीलों की संख्या बढ़
रही है, वहीं अधिकारियों पर जुर्माने
का ग्राफ भी काफी ऊपर जा चुका है।
राज्य
सूचना आयोग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2013-14 में 1.40 लाख से अधिक लोगों ने राज्य सरकार या उससे नीचे के
दफ्तरों से सूचनाएं मांगी। एक अप्रैल 2014 के बाद पौने दो से दो लाख के
बीच आवेदन आने का अनुमान लगाया जा रहा है। कानून लागू होने से अब तक राज्य में इन
दफ्तरों से करीब पौने सात लाख लोग सूचना मांग चुके हैं।
पांच
लाख से अधिक दिलाया हर्जाना
सूचना
आयोग की वर्ष 2014-15 की रिपोर्ट तो अभी नहीं आई है, लेकिन वर्ष 2013-14 तक सूचना के आवेदनों से राज्य
के खजाने में करीब 1.39 करोड़ रूपए आए। इसमें वर्ष 2013-14 में सरकारी खजाने में आई राशि को ही जोड़ लिया जाए
तो अब तक सरकार के पास सूचना का अधिकार कानून से कुल पौने दो करोड़ रूपए से अधिक आ
चुके। इसके विपरीत अधिकारियों पर सूचना समय पर नहीं देने या आधी-अधूरी देने पर
करीब सवा दो करोड़ रूपए का जुर्माना लग चुका है। इसके अलावा आयोग परेशान आवेदकों
को हर्जाने के रूप में सरकार से पांच लाख रूपए से अधिक राशि दिला चुका है, जिसके लिए सूचना अटकाने वाले अधिकारी ही जिम्मेदार
हैं।
अब
तक पांच जिलों से ही सूचना
जयपुर
निवासी मुकेश गोस्वामी ने 23 दिसम्बर 2013 को राज्य विद्युत विनियामक आयोग से श्रेणीवार
विद्युत उपभोक्ताओं तथा वित्त विभाग से ऊर्जा विभाग की देनदारियों के बारे में
सूचनाएं मांगी, लेकिन दोनों ही सूचनाओं के लिए
आवेदन अब तक बिजली कंपनियों के दफ्तरों में घूम रहे हैं। विद्युत वितरण कंपनियां
श्रेणीवार उपभोक्ताओं की जानकारी भी अब तक केवल पांच जिलों जयपुर, दौसा,
धौलपुर, टोंक व करौली जिलों की दे पाई हैं, तीन जिलों के बिजली कंपनियों के अधिकारियों ने हाल ही
आवेदक से सूचनाएं के लिए शुल्क मांगा है।
नहीं
मिल रही एमपी-एमएलए के कार्यां की जानकारी
जयपुर
निवासी कमल टाक ने मार्च 2013 में सांसद और विधायकों के
कोष् से चार साल में हुए कार्यो के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन अब तक 20 जिलों से ही सूचना मिल पाई है
और वह भी अधूरी ही मिली है। इस बारे में टाक ने सरकार से मांग की है कि इस तरह की
सूचना तो जिला परिषदों से आरटीआई अधिनियम की धारा 4
के तहत स्वत: ही सार्वजनिक करवाई जाए,
जिससे इन फंड से होने
वाले कार्यो पर जनता की निगरानी बढ़ सकेगी।
सूचना
के लिए आवेदन
·
पहले साल वर्ष 2006-07 में - 9140
·
वर्ष 2013-14 में आए - 140539
सरकार
को राजस्व मिला
·
पहले साल वर्ष 2006-07 में - 97028
·
वर्ष 2013-14 में - 3930747
अधिकारियों
पर जुर्माना
·
पहले साल वर्ष 2006-07 में - 5 हजार रूपए
·
वर्ष 2013-14 में - 80 लाख