Friday, May 08, 2015

यहां RTI लगाने पर होता है सामाजिक बहिष्कार

आईबीएन-7: शिमला: Friday, 08 May 2015.
सूचना का अधिकार अधिनियम हर हिन्दोस्तानी को सरकार ने भरष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने का हतियार दिया है। लेकिन ये हथियार ही अभिशाप बन जाए तो क्या कहेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय से आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार अब तक देश में आरटीआई के इस्तेमाल पर 24 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और 159 लोगों पर जानलेवा हमले हुए।
हालांकि हिमाचल में अभी तक किसी भी आरटीआई कार्यकर्ता को अपनी ज़िंदगी से हाथ धोना नहीं पड़ा है। लेकिन जानलेवा हमले कई आरटीआई कार्यकर्ता पर हुए। चंबा जिले के अंतर्गत आने वाले तीसा का कल्हेल ऐसा इलाका है जहां मुस्लिम समुदाय के लोग अधिक रहते हैं। यहां अगर कोई मुस्लिम समुदाय के प्रधान के खिलाफ कोई भ्रष्टचार के खिलाफ आरटीआई का प्रयोग करता है तो खाप उसका सामाजिक बहिष्कार कर देता है।
अब तक यहां 6 लोगों का सामाजिक बहिष्कार हो चुका है। आरटीआई का प्रयोग करने के बाद लाखों करोड़ों का गबन सामने आने पर खाप उस व्यक्ति विशेष का समाज से हुक्का पानी बंद कर देता है। पहले तो ये अपने समुदाय की दुहाई देते हैं कि अगर सरकारी धन किसी प्रधान ने खाया तो समाज में किसी व्यक्ति को तकलीफ नहीं होनी चाहिए। क्योंकि सरकार का पैसा लिया है, किसी की जेब से क्या गया।
यहां के एक परिवार जिसका सामाजिक बहिष्कार हुआ था, उस परिवार के जान मोहम्मद ने आरटीआई का प्रयोग करते हुए इसी समुदाय के सरमायेदार प्रधान के लाखों रुपये के गबन को सामने लाए। इस पर उन्हें काफी प्रताड़ित किया गया, लेकिन इस परिवार ने हार नहीं मानी और 16 लोग के खिलाफ चंबा के सत्र एवं जिला कोर्ट में मुकदमा दर्ज करवाया। ये 16 लोग गिरफ्तार हुए जो बाद में जमानत पर रिहा हुए।
सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल चुके जान मोहम्मद का कहना है कि चंबा जिले का तीसा मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। भ्रष्टाचार के खिलाफ अगर कोई आवाज उठाता है तो उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है। हमारा भी सामाजिक बहिष्कार हुआ है। तीन-चार साल तक समाज से बाहर कर दिया जाता है। सरकार को चाहिए कोई कड़ा कानून लाया जाए ताकि इस तरह से ये घिनौना काम नहीं होना चाहिए।