नवभारत
टाइम्स: मध्य
प्रदेश: Saturday, 15 November 2014.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक शानदार पहल की है कि वह
जनता से सीधे संवाद करते हैं। उन्होंने कहा भी है कि लोग उन्हें शिकायत या सुझाव
भेजें। लेकिन सिर्फ शिकायत या सुझाव भेज देने से कार्रवाई हो जाएगी, ऐसा आप न सोचें।
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पर प्रधानमंत्री से
बातचीत करने के अनूठे विकल्प से प्रभावित होकर मई-जून 2014 में मध्य प्रदेश के नीमच में रहने वाले आरटीआई
कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने प्रधानमंत्री को सुझाव और शिकायतों के कई पत्र लिखे।
लेकिन, काफी समय बाद भी जब कोई
कार्रवाई नहीं हुई तो गौड़ ने पीएमओ में 8 अगस्त 2014 को एक आरटीआई आवेदन लगाकर यह जानना चाहा कि उनके द्वारा
भेजी गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई।
गौड़ की आरटीआई के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय के जनता
अनुभाग ने बताया है कि 15 जून को भेजे गए ईमेल 29 अगस्त को कार्रवाई के लिए रेलवे बोर्ड को भेज दिए
गए। यानी 8 अगस्त को आरटीआई भेजने के बाद
पीएमओ को कार्रवाई की सूझी। यही हाल 17 जून को भेजी गई शिकायत का
हुआ। उसे भी 29 अगस्त को आईटी डिपार्टमेंट को
भेजा गया।
इस बारे में गौड़ कहते हैं, 'हो
सकता है कि हर शिकायत का हश्र ऐसा न होता हो,
पर इस मामले में तो ऐसा
ही हुआ है! हालांकि प्रधानमंत्री की पहल अच्छी है पर इसमें तत्काल सुधार की जरूरत
हैं!'
इस पूरी प्रक्रिया की एक और खामी की और गौड़ ध्यान दिलाते
हैं। वह बताते हैं, 'शिकायत दर्ज करने वाले फॉर्मैट
में एक दिक्कत यह भी हैं पीएम की साइट पर शिकायत या सुझाव भेजने के बाद न तो
शिकायतकर्ता के पास भेजी गई शिकायत की कोई प्रति उपलब्ध रहती है, न ही किसी प्रकार के अटैचमेंट का विकल्प उलब्ध है।
साईट पर शिकायत भेजने के बाद आपको कोई रजिस्ट्रेशन नंबर भी नहीं मिलता जिससे आप
अपनी शिकायत की स्थिति का पता कर सकें। ऐसे में हर व्यक्ति को क्या आरटीआई भेजनी
होगी?'
शुरुआत में प्रधानमंत्री को सन्देश भेजने पर आपके ई-मेल
अड्रेस पर एक ऑटो जनरेटेड एक्नॉलेजमेंट आता था लेकिन गौड़ के मुताबिक कुछ समय बाद
हुए बदलाव के कारण अब वह भी आना बंद हो गया है।