Dainik Bhaskar: Bihar: Monday, 14th September
2026.
अनुमंडलीय अस्पताल बगहा में आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी छह साल तक नहीं देने पर लोक सूचना पदाधिकारी सह पूर्व उपाधीक्षक पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया है। राज्य सूचना आयोग ने इसे अपने आदेश की अवहेलना माना। आयोग ने अपीलार्थी को सभी लंबित सूचनाएं देने का निर्देश दिया है। रामनगर निवासी नरेंद्र कुमार राय ने 16 सितंबर 2019 को आरटीआई आवेदन देकर अस्पताल के एक्स-रे केंद्र से जुड़ी जानकारी मांगी थी। लेकिन समय पर सूचना नहीं मिली। उन्होंने नवंबर 2019 में प्रथम अपील दायर की, इसके बाद मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा। आयोग ने 6 जुलाई 2026 की सुनवाई में लोक सूचना पदाधिकारी को अंतिम अवसर दिया था। प्रपत्र-क की कंडिका-3 में मांगी गई सूचनाएं देने का निर्देश दिया था। इसमें एक्स-रे की अनुज्ञप्ति, किए गए अनुबंध, टेक्नीशियन व रेडियोलॉजिस्ट के नियुक्ति पत्र समेत अन्य अभिलेख शामिल थे। तय समय बीत गया, सूचना नहीं दी गई। आयोग के सामने अनुपालन प्रतिवेदन भी नहीं रखा गया। 12 अगस्त 2026 की सुनवाई में अपीलार्थी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए। लोक सूचना पदाधिकारी अनुपस्थित रहे। आयोग ने इसे आरटीआई अधिनियम के प्रति गंभीर लापरवाही माना। आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत 25 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया। आदेश की प्रति पश्चिमी चंपारण के जिला पदाधिकारी, सिविल सर्जन, कोषागार पदाधिकारी, बिहार महालेखाकार को भेजी गई है।
अनुमंडलीय अस्पताल बगहा में आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी छह साल तक नहीं देने पर लोक सूचना पदाधिकारी सह पूर्व उपाधीक्षक पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया है। राज्य सूचना आयोग ने इसे अपने आदेश की अवहेलना माना। आयोग ने अपीलार्थी को सभी लंबित सूचनाएं देने का निर्देश दिया है। रामनगर निवासी नरेंद्र कुमार राय ने 16 सितंबर 2019 को आरटीआई आवेदन देकर अस्पताल के एक्स-रे केंद्र से जुड़ी जानकारी मांगी थी। लेकिन समय पर सूचना नहीं मिली। उन्होंने नवंबर 2019 में प्रथम अपील दायर की, इसके बाद मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा। आयोग ने 6 जुलाई 2026 की सुनवाई में लोक सूचना पदाधिकारी को अंतिम अवसर दिया था। प्रपत्र-क की कंडिका-3 में मांगी गई सूचनाएं देने का निर्देश दिया था। इसमें एक्स-रे की अनुज्ञप्ति, किए गए अनुबंध, टेक्नीशियन व रेडियोलॉजिस्ट के नियुक्ति पत्र समेत अन्य अभिलेख शामिल थे। तय समय बीत गया, सूचना नहीं दी गई। आयोग के सामने अनुपालन प्रतिवेदन भी नहीं रखा गया। 12 अगस्त 2026 की सुनवाई में अपीलार्थी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए। लोक सूचना पदाधिकारी अनुपस्थित रहे। आयोग ने इसे आरटीआई अधिनियम के प्रति गंभीर लापरवाही माना। आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत 25 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया। आदेश की प्रति पश्चिमी चंपारण के जिला पदाधिकारी, सिविल सर्जन, कोषागार पदाधिकारी, बिहार महालेखाकार को भेजी गई है।
