Monday, July 27, 2026

भोपाल नगर निगम का बड़ा कारनामा: 'हाउसिंग फॉर ऑल' के 18 में से 17 प्रोजेक्ट बिना पर्यावरण मंजूरी के, RTI में खुलासा

Nai Dunia: Bhopal: Monday, 27 July 2026.
राहुल नगर, कोकता और भानपुर जैसे प्रोजेक्ट्स में निर्माण पूरा होने के बाद लोग रहना भी शुरू कर चुके हैं, जिससे पर्यावरणीय और कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं।
राजधानी भोपाल में नगर निगम द्वारा संचालित
'हाउसिंग फॉर ऑल' योजना में बड़ा प्रशासनिक और पर्यावरणीय उल्लंघन सामने आया है। नगर निगम के कुल 18 प्रोजेक्ट्स में से 17 प्रोजेक्ट्स बिना पर्यावरण मंजूरी (एनवायरनमेंट क्लीयरेंस) के चल रहे हैं।
सूचना के अधिकार के तहत मिली इस जानकारी ने निगम प्रशासन द्वारा पर्यावरण मानकों और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूरे 18 प्रोजेक्ट्स में से केवल राहुल नगर प्रोजेक्ट को ही पर्यावरण मंजूरी हासिल है। वहीं, 10 परियोजनाओं के लिए तो निगम ने अब तक आवेदन तक नहीं किया है, जबकि 7 प्रोजेक्ट्स की फाइलें प्रक्रिया में या लंबित हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राहुल नगर, कोकटा और भानपुर जैसे प्रोजेक्ट्स पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं और यहाँ लोग रहने भी लगे हैं।
आरटीआई से हुआ खुलासा: कहाँ अटकी है फाइलें?
सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सक्सेना द्वारा मांगी गई आरटीआई जानकारी के अनुसार:
केवल 1 प्रोजेक्ट को मंजूरी: राहुल नगर प्रोजेक्ट
7 प्रोजेक्ट्स के आवेदन लंबित: कोकटा, मालिकहेड़ी, भानपुर, गंगा नगर, हिनौतिया आलम, बाग मुगालिया और 12 नंबर बस स्टॉप। (12 नंबर बस स्टॉप की एप्लीकेशन अभी सबमिट होने की प्रक्रिया में है)।
10 प्रोजेक्ट्स बिना आवेदन के: 10 प्रोजेक्ट्स के लिए अब तक पर्यावरण क्लीयरेंस का आवेदन तक नहीं जमा किया गया है।
प्रकृति और स्वास्थ्य के लिए बड़ा नुकसान:
पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञों अनुसार, पर्यावरण मंजूरी सिर्फ एक कागजी औपचारिकता नहीं बल्कि एक कानूनी और सामाजिक सुरक्षा प्रक्रिया है। बिना क्लीयरेंस के निर्माण कार्यों से कई गंभीर खतरे पैदा होते हैं।
भूजल स्तर गिरने का खतरा: बिना पर्यावरणीय मूल्यांकन के अंधाधुंध भूजल दोहन से आसपास के इलाकों में जलस्तर तेजी से नीचे जा सकता है।
पेड़ों की कटाई का हिसाब नहीं: निर्माण में कितने पेड़ काटे गए और उनके बदले कितने नए पौधे लगे, इसका कोई प्रामाणिक आकलन नहीं हो पाता।
जलभराव और बाढ़ की आशंका: अक्सर नेचुरल ड्रेनेज बंद या डायवर्ट कर दिए जाते हैं, जिससे जलभराव का खतरा बढ़ जाता है।
जल स्रोत प्रदूषित होना: एसटीपी ( सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की सही योजना न होने से बिना शोधन का गंदा पानी नालों, जमीन और तालाबों में मिलकर जल स्रोतों को दूषित करता है।
एनजीटी की गाज व आर्थिक नुकसान: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भारी जुर्माना लगा सकता है या निर्माण तोड़ने तक के आदेश दे सकता है, जिससे मकान खरीदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर: धूल-मिट्टी, वायु प्रदूषण और अनुचित वेंटिलेशन के कारण रहवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है।
नगर निगम का पक्ष:
नगर निगम अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ शर्मा के अनुसार प्रोजेक्ट की समीक्षा में यह जानकारी सामने आई है कि पूर्व में एनवायरनमेंट क्लीयरेंस नहीं ली गई है। इनमें से दो प्रोजेक्ट 20 हजार वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल के हैं, जिनमें ईसी की आवश्यकता नहीं होती। शेष सभी प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूरी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। नियमों का पालन सख्ती से सुनिश्चित किया जाएगा।