Navodaya Times: New Delhi: Thursday, 16 July 2026.
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे लोक सेवकों की पहचान को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत निजी जानकारी नहीं माना जा सकता। सीआईसी ने यह फैसला रेलवे को दो अलग-अलग मामलों में यात्रा टिकट परीक्षकों (टीटीई) के नाम और पदनाम सार्वजनिक करने का निर्देश देते हुए सुनाया। सूचना आयुक्त स्वागत दास ने उत्तर पश्चिम रेलवे और पश्चिम रेलवे के खिलाफ अलग-अलग सुनाए गए फैसलों में कहा कि रेलवे ने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे टीटीई के नाम और पदनाम बताने से इनकार करने के लिए आरटीआई कानून की धारा 8(ए)(जे) के तहत हासिल छूट का गलत इस्तेमाल किया।
मामला उदयपुर एक्सप्रेस में तैनात एक टीटीई से जुड़ा हुआ था
इनमें से एक मामला उदयपुर एक्सप्रेस में तैनात एक टीटीई से जुड़ा हुआ था, जिसमें अपील करने वाले ने अधिकारी के नाम और पद के साथ-साथ उनसे जुड़ी शिकायतों, सतर्कता रिकॉर्ड, अनुशासनात्मक कार्यवाही और सेवा से जुड़ी अन्य जानकारियां मांगी थीं। वहीं, दूसरा मामला असरवा-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस से संबंधित था, जिसमें अपीलकर्ता ने ड्यूटी पर तैनात टीटीई का नाम, कर्मचारी आईडी और पदनाम जानना चाहा था। दास ने दोनों ही मामलों में रेलवे की दलीलों को खारिज करते हुए कहा, "सार्वजनिक सेवा में अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे किसी लोक सेवक की पहचान उसके सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन से जुड़ी जानकारी होती है और इसे आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत छूट प्राप्त 'व्यक्तिगत जानकारी' नहीं माना जा सकता।"
सीआईसी ने कहा कि लोक सेवकों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आरटीआई कानून के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उसने कहा कि ऐसी बुनियादी जानकारी देने से इनकार करना कानून के मूल उद्देश्य को विफल कर देगा और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता की कमी को बढ़ावा देगा। आयोग ने संबंधित सीपीआईओ को निर्देश दिया कि वे संबंधित टीटीई के नाम और पद से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराएं।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे लोक सेवकों की पहचान को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत निजी जानकारी नहीं माना जा सकता। सीआईसी ने यह फैसला रेलवे को दो अलग-अलग मामलों में यात्रा टिकट परीक्षकों (टीटीई) के नाम और पदनाम सार्वजनिक करने का निर्देश देते हुए सुनाया। सूचना आयुक्त स्वागत दास ने उत्तर पश्चिम रेलवे और पश्चिम रेलवे के खिलाफ अलग-अलग सुनाए गए फैसलों में कहा कि रेलवे ने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे टीटीई के नाम और पदनाम बताने से इनकार करने के लिए आरटीआई कानून की धारा 8(ए)(जे) के तहत हासिल छूट का गलत इस्तेमाल किया।
मामला उदयपुर एक्सप्रेस में तैनात एक टीटीई से जुड़ा हुआ था
इनमें से एक मामला उदयपुर एक्सप्रेस में तैनात एक टीटीई से जुड़ा हुआ था, जिसमें अपील करने वाले ने अधिकारी के नाम और पद के साथ-साथ उनसे जुड़ी शिकायतों, सतर्कता रिकॉर्ड, अनुशासनात्मक कार्यवाही और सेवा से जुड़ी अन्य जानकारियां मांगी थीं। वहीं, दूसरा मामला असरवा-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस से संबंधित था, जिसमें अपीलकर्ता ने ड्यूटी पर तैनात टीटीई का नाम, कर्मचारी आईडी और पदनाम जानना चाहा था। दास ने दोनों ही मामलों में रेलवे की दलीलों को खारिज करते हुए कहा, "सार्वजनिक सेवा में अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे किसी लोक सेवक की पहचान उसके सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन से जुड़ी जानकारी होती है और इसे आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत छूट प्राप्त 'व्यक्तिगत जानकारी' नहीं माना जा सकता।"
सीआईसी ने कहा कि लोक सेवकों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आरटीआई कानून के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उसने कहा कि ऐसी बुनियादी जानकारी देने से इनकार करना कानून के मूल उद्देश्य को विफल कर देगा और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता की कमी को बढ़ावा देगा। आयोग ने संबंधित सीपीआईओ को निर्देश दिया कि वे संबंधित टीटीई के नाम और पद से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराएं।
