Jagran: New Delhi: Monday, 6th July 2026.
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने फैसला सुनाया है कि सरकारी विभाग मंदिर से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अपनी जिम्मेदारी से यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि मंदिर 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं है।
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है। सीआईसी ने पुडुचेरी के हिंदू धार्मिक संस्थान और वक्फ विभाग को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि कोई मंदिर 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं है, सिर्फ इस दलील के आधार पर सरकारी विभाग मंदिर से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अपनी वैधानिक जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता।
दरअसल, यह पूरा मामला 'श्री वेदपुरीश्वरर श्री वरदराजपेरुमल देवस्थानम' मंदिर से जुड़े रिकॉर्ड्स और बजट की जानकारी मांगने से जुड़ा है। एक आवेदक ने पुडुचेरी के हिंदू धार्मिक संस्थान और वक्फ विभाग से इस मंदिर के साल 2021 से 2025 तक के वार्षिक बजट, ऑडिट रिपोर्ट, संपत्तियों के हस्तांतरण और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ आई शिकायतों तथा उन पर हुई कार्रवाई का ब्योरा मांगा था।
विभाग अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता
विभाग ने इस आरटीआई आवेदन को मंदिर प्रशासन के पास भेज दिया। लेकिन मंदिर प्रशासन ने यह कहते हुए जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया कि देवस्थानम को पुडुचेरी सरकार से कोई बड़ी वित्तीय मदद नहीं मिलती, इसलिए वह आरटीआई कानून की धारा 2(एच) के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं है।
इस पर सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त पी.आर. रमेश ने बेहद भावपूर्ण और तार्किक रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवेदक ने जानकारी मंदिर से नहीं, बल्कि सरकारी विभाग से मांगी थी, जो कि आरटीआई कानून के तहत खुद एक 'पब्लिक अथॉरिटी' है।
सीआइसी ने कहा कि भले ही मंदिर सीधे तौर पर इस कानून के दायरे में न आता हो, लेकिन जो रिकॉर्ड कानूनन सरकारी विभाग के पास मौजूद हैं या उसकी कस्टडी में हैं, उन्हें देने से विभाग इनकार नहीं कर सकता। सिर्फ आवेदन को दूसरी जगह ट्रांसफर कर देने से विभाग की जवाबदेही खत्म नहीं हो जाती।
पारदर्शिता और सूचना के अधिकार की जीत
सीआईसी ने विभाग की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि शिकायतों और जांच से जुड़ी जानकारियां आरटीआई के दायरे में नहीं आतीं। आयोग ने कहा कि अगर विभाग के पास शिकायतों, जांच की स्थिति और अनुशासनात्मक कार्रवाई का रिकॉर्ड मौजूद है, तो वह कानूनन 'सूचना' की श्रेणी में आता है।
आयोग ने विभाग को आदेश दिया है कि वह बजट, ऑडिट खातों और शिकायतों से जुड़े सवालों की समीक्षा करे और बिंदुवार संशोधित जवाब दाखिल करे। साथ ही, आवेदक को जरूरी दस्तावेजों का निरीक्षण करने की सुविधा भी दी जाए। सीआईसी का यह फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने और आस्था के केंद्रों के प्रबंधन में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने फैसला सुनाया है कि सरकारी विभाग मंदिर से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अपनी जिम्मेदारी से यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि मंदिर 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं है।
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है। सीआईसी ने पुडुचेरी के हिंदू धार्मिक संस्थान और वक्फ विभाग को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि कोई मंदिर 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं है, सिर्फ इस दलील के आधार पर सरकारी विभाग मंदिर से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अपनी वैधानिक जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता।
दरअसल, यह पूरा मामला 'श्री वेदपुरीश्वरर श्री वरदराजपेरुमल देवस्थानम' मंदिर से जुड़े रिकॉर्ड्स और बजट की जानकारी मांगने से जुड़ा है। एक आवेदक ने पुडुचेरी के हिंदू धार्मिक संस्थान और वक्फ विभाग से इस मंदिर के साल 2021 से 2025 तक के वार्षिक बजट, ऑडिट रिपोर्ट, संपत्तियों के हस्तांतरण और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ आई शिकायतों तथा उन पर हुई कार्रवाई का ब्योरा मांगा था।
विभाग अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता
विभाग ने इस आरटीआई आवेदन को मंदिर प्रशासन के पास भेज दिया। लेकिन मंदिर प्रशासन ने यह कहते हुए जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया कि देवस्थानम को पुडुचेरी सरकार से कोई बड़ी वित्तीय मदद नहीं मिलती, इसलिए वह आरटीआई कानून की धारा 2(एच) के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं है।
इस पर सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त पी.आर. रमेश ने बेहद भावपूर्ण और तार्किक रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवेदक ने जानकारी मंदिर से नहीं, बल्कि सरकारी विभाग से मांगी थी, जो कि आरटीआई कानून के तहत खुद एक 'पब्लिक अथॉरिटी' है।
सीआइसी ने कहा कि भले ही मंदिर सीधे तौर पर इस कानून के दायरे में न आता हो, लेकिन जो रिकॉर्ड कानूनन सरकारी विभाग के पास मौजूद हैं या उसकी कस्टडी में हैं, उन्हें देने से विभाग इनकार नहीं कर सकता। सिर्फ आवेदन को दूसरी जगह ट्रांसफर कर देने से विभाग की जवाबदेही खत्म नहीं हो जाती।
पारदर्शिता और सूचना के अधिकार की जीत
सीआईसी ने विभाग की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि शिकायतों और जांच से जुड़ी जानकारियां आरटीआई के दायरे में नहीं आतीं। आयोग ने कहा कि अगर विभाग के पास शिकायतों, जांच की स्थिति और अनुशासनात्मक कार्रवाई का रिकॉर्ड मौजूद है, तो वह कानूनन 'सूचना' की श्रेणी में आता है।
आयोग ने विभाग को आदेश दिया है कि वह बजट, ऑडिट खातों और शिकायतों से जुड़े सवालों की समीक्षा करे और बिंदुवार संशोधित जवाब दाखिल करे। साथ ही, आवेदक को जरूरी दस्तावेजों का निरीक्षण करने की सुविधा भी दी जाए। सीआईसी का यह फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने और आस्था के केंद्रों के प्रबंधन में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
