Sunday, June 14, 2026

बिना निर्माण 20 सोकपिटों का भुगतान होने का आरोप:लखीमपुर में RTI से खुली ग्राम पंचायत के विकास कार्यों की पोल

Dainik Bhaskar: Uttar Pradesh: Sunday, 14 June 2026.
लखीमपुर खीरी के निघासन क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त अभिलेखों के आधार पर आरोप लगाया है कि करीब
20 सोकपिटों का निर्माण कराए बिना ही उनका भुगतान कर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि अभिलेखों में जिन स्थानों पर सोकपिट निर्माण दर्शाया गया है, वहां मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं मिला। आरोप है कि सरकारी धन खर्च दिखाकर कार्य पूर्ण दर्शा दिए गए, जबकि जमीनी स्तर पर निर्माण नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने विशेष रूप से सोकपिट संख्या-122 का मामला उठाया है। उनका दावा है कि दौलतापुर निवासी दौलतराम पुत्र हेमराज के घर की छत पर केवल योजना संबंधी विवरण लिखकर कार्य पूर्ण दिखा दिया गया और भुगतान भी कर दिया गया। ग्रामीणों ने इसके समर्थन में तस्वीरें भी उपलब्ध कराई हैं।
आरटीआई में सामने आए कई सवाल
ग्रामीणों ने आरटीआई के माध्यम से ह्यूम पाइप खरीद, सोकपिट निर्माण, स्वच्छता कार्य, ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा की बैठकों की कार्यवाही, हैंडपंप रीबोर और मरम्मत समेत विभिन्न विकास कार्यों से संबंधित अभिलेख प्राप्त किए थे। दस्तावेजों की जांच के बाद उन्होंने कई मदों में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन कराए जाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अभिलेखों में दर्ज कार्यों की स्थलीय जांच कराई जाए और यदि अनियमितताएं साबित होती हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी धन की रिकवरी भी सुनिश्चित की जाए।
खंड विकास अधिकारी जयेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि उन्हें शिकायत के साथ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध कराए जाते हैं, तो पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकेगी।