Dainik Bhaskar: Ajmer: Monday, 15 June 2026.
देश में लोकतंत्र को मजबूत करने वाले सूचना के अधिकार कानून को लागू करने के लिए जहां सबसे बड़ा 44 दिन तक धरना किया गया, उसी ब्यावर में दुनिया का पहला आरटीआई लिविंग म्यूजियम बनेगा। इसके लिए नरबद खेड़ा (केसरपुरा क्षेत्र) में 1 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। इसके निर्माण की लागत ढाई करोड़ है। पहले फेज में 85 लाख रुपए मिल भी चुके हैं। 21 साल पहले 15 जून को यहीं से आरटीआई के लिए आंदोलन की शुरुआत हुई थी, इसके बाद जयपुर और अन्य जगह पर आंदोलन किया गया।
मजदूर किसान शक्ति संगठन व आरटीआई आंदोलन की प्रणेता सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय बताती हैं कि इस म्यूजियम का निर्माण और संचालन स्कूल फॉर डेमोक्रेसी (लोकतंत्र की पाठशाला) संस्था की ओर से किया जा रहा है। इस संग्रहालय को पारंपरिक म्यूजियम से अलग एक लिविंग म्यूजियम (जीवंत संग्रहालय) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें वर्ष 1996 के ब्यावर धरने और जनआंदोलन से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, तस्वीरें, पोस्टर, पर्चे और अभिलेख, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और फिल्म फुटेज, मजदूर किसान शक्ति संगठन और राष्ट्रीय सूचना अधिकार अभियान के संघर्षों की गाथा दिखाई जाएगी। इसके अलावा यह एक रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर बनेगा।
देश में लोकतंत्र को मजबूत करने वाले सूचना के अधिकार कानून को लागू करने के लिए जहां सबसे बड़ा 44 दिन तक धरना किया गया, उसी ब्यावर में दुनिया का पहला आरटीआई लिविंग म्यूजियम बनेगा। इसके लिए नरबद खेड़ा (केसरपुरा क्षेत्र) में 1 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। इसके निर्माण की लागत ढाई करोड़ है। पहले फेज में 85 लाख रुपए मिल भी चुके हैं। 21 साल पहले 15 जून को यहीं से आरटीआई के लिए आंदोलन की शुरुआत हुई थी, इसके बाद जयपुर और अन्य जगह पर आंदोलन किया गया।
मजदूर किसान शक्ति संगठन व आरटीआई आंदोलन की प्रणेता सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय बताती हैं कि इस म्यूजियम का निर्माण और संचालन स्कूल फॉर डेमोक्रेसी (लोकतंत्र की पाठशाला) संस्था की ओर से किया जा रहा है। इस संग्रहालय को पारंपरिक म्यूजियम से अलग एक लिविंग म्यूजियम (जीवंत संग्रहालय) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें वर्ष 1996 के ब्यावर धरने और जनआंदोलन से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, तस्वीरें, पोस्टर, पर्चे और अभिलेख, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और फिल्म फुटेज, मजदूर किसान शक्ति संगठन और राष्ट्रीय सूचना अधिकार अभियान के संघर्षों की गाथा दिखाई जाएगी। इसके अलावा यह एक रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर बनेगा।
