Monday, May 04, 2026

MSN.CON: New Delhi: Monday, May 04, 2026.
रूस से भारत के तेल आयात के डेटा को लेकर पारदर्शिता पर बहस छिड़ गई है। अधिकारियों ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत इसे लेकर आंकड़े साझा करने से इनकार कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत काम करने वाले पेट्रोलियम प्‍लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) ने इसके पीछे तर्क दिया है। प्रकोष्‍ठ का कहना है कि ऐसी जानकारी व्यावसायिक रूप से संवेदनशील है। इसे सार्वजनिक रूप से जाहिर नहीं किया जा सकता। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस रुख का समर्थन किया है। ऐसा करते हुए व्यापक राष्ट्रीय और भू-राजनीतिक पहलुओं का हवाला दिया है।
क्या था मामला?
यह मामला एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा है। इसमें जून 2022 से जून 2025 के बीच रूस से भारत आने वाले कच्चे तेल की खेप के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई थी।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस अनुरोध में विशेष रूप से कंपनी-वार ब्योरा मांगा गया था।
इसमें आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल, ओएनजीसी विदेश, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल थीं।
हालांकि, केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) ने इस अनुरोध को खारिज करते हुए कहा: 'कच्चे तेल के आयात से संबंधित देश-वार और कंपनी-वार जानकारी व्यावसायिक और गोपनीय प्रकृति की है। आरटीआई अधिनियम 2005 के सेक्शन 8(1) (डी) और 8 (1) (ई) के तहत इसे जाहिर करने से छूट हासिल है। हालांकि, कच्चे तेल के आयात की कुल मात्रा और मूल्य (वर्तमान और ऐतिहासिक दोनों) पीपीएसी की वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं।'
आवेदक ने क्या दिया था तर्क?
सुनवाई के दौरान आवेदक ने तर्क दिया कि इस क्षेत्र के कामकाज को समझने के लिए ऐसे डेटा तक पहुंच जरूरी है। इसके बावजूद आयोग ने जानकारी जाहिर न करने के पक्ष में फैसला सुनाया।
अपने अंतरिम आदेश में सीआईसी ने कहा कि जानकारी जाहिर करने से रणनीतिक और आर्थिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। साथ ही दूसरे देशों के साथ संबंधों पर भी असर पड़ेगा। इस बात पर जोर दिया कि यह मुद्दा संवेदनशील भू-राजनीतिक समीकरणों से जुड़ा हुआ है।
आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(ए) और 8(1)(डी) के तहत दी गई छूट को बरकरार रखा। यह निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में कोई अतिरिक्त राहत नहीं दी जा सकती।
सरकार के रुख का समर्थन पर इसलिए जताई चिंंता
गोपनीयता पर सरकार के रुख का समर्थन करते हुए भी आयोग ने प्रक्रियागत चूकों को लेकर चिंताएं जताईं। आयोग ने पीपीएसी के अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कारण है कि पूर्व सूचना दिए जाने के बावजूद वह सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए थे। आयोग ने पूछा कि आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
इसके अलावा, सीआईसी ने जानकारी को सक्रिय रूप से जाहिर करने के मामले में भी कमियां पाईं। इसमें यह बताया गया कि जवाब देने वाले की वेबसाइट पर 'सूचना का अधिकार' टैब में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। अथॉरिटी को निर्देश दिया गया कि वह आरटीआई एक्ट, 2005 के सेक्‍शन 4 का पालन सुनिश्चित करे।
सेक्‍शन 25(5) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आयोग ने अथॉरिटी को सलाह दी कि वह अपनी तरफ से दी जाने वाली जानकारियों को और बेहतर बनाए। इनमें संगठन से जुड़ी जानकारी, भूमिकाएं और जिम्‍मेदाररियां, अधिकारियों की शक्तियां, दस्तावेजों की श्रेणियां, कर्मचारियों की सूची और वेतन संरचनाएं प्रकाशित करना शामिल है।