Saturday, April 11, 2026

3 साल तक खसरे की जानकारी दबाए बैठे रहे अफसर, 6 अधिकारियों को सूचना आयोग का हंटर

ETV Bharat: Calcutta: Saturday, 11 April 2026.
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को तीन साल तक लंबित रखने का मामला. आयोग ने 16 अप्रैल 2026 को सभी अधिकारियों को किया जवाब तलब.
मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग (ETV Bharat)
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को तीन साल तक लंबित रखने का मामला अफसरों पर भारी पड़ता दिख रहा है. अब इस मामले में मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए भोपाल के छह अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. आयोग ने सभी अधिकारियों को
16 अप्रैल 2026 को सुबह 10.30 बजे भोपाल स्थित सूचना भवन में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं.
बता दें कि पूरा मामला जहांगीराबाद क्षेत्र की एक जमीन के खसरे की जानकारी से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2022 में आरटीआई के तहत मांगा गया था. लेकिन तय समय सीमा के बावजूद जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई.
2022 में मांगी गई थी खसरे की जानकारी
मामला भोपाल निवासी अरविंद शाक्याद्वारा 27 जुलाई 2022 को लगाए गए आरटीआई आवेदन से जुड़ा है. आवेदन में जहांगीराबाद क्षेत्र के नजूल शहर वृत्त के खसरा नंबर 999 से संबंधित जानकारी मांगी गई थी. आरटीआई कानून के अनुसार 30 दिनों के भीतर जानकारी देना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में तीन साल बीत जाने के बावजूद आवेदक को जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई. लगातार देरी और जवाब नहीं मिलने पर यह मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचा.
आयोग ने लिया सख्त संज्ञान
इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य मुख्य सूचना आयुक्त विजय यादव ने पाया कि निर्धारित समयसीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई. आयोग ने वर्तमान लोक सूचना अधिकारी दीपक पांडे को दो बार नोटिस जारी कर आयोग में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे, लेकिन वे पेश नहीं हुए. तीसरी बार बुलाए जाने पर उन्होंने आयोग को बताया कि संबंधित जानकारी तत्कालीन अधिकारियों के कार्यकाल से जुड़ी है और उसी समय जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी.
छह अधिकारियों को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) और धारा 20(2) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है. आयोग ने आशुतोष शर्मा, एलके खरे, आदित्य जैन, जमील खान, अमन मिश्रा और इकबाल मोहम्मद को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इन सभी अधिकारियों से पूछा गया है कि समय पर जानकारी उपलब्ध न कराने के लिए उनके खिलाफ जुर्माना या अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए.
16 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
सूचना आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को तय की है. सभी संबंधित अधिकारियों को सूचना भवन, भोपाल में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों के तहत आर्थिक दंड और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है. इस फैसले के बाद आरटीआई मानना है कि इस कार्रवाई से सरकारी विभागों में आरटीआई आवेदनों के प्रति जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने का संदेश जाएगा.