Dainik Bhaskar: Pilibhit: Wednesday, 15 April 2026.
पीलीभीत में सोमवार को गांधी सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के क्रियान्वयन को लेकर गहरी नाराजगी जताई।
बैठक में जन सूचना अधिकारियों (PIO) के कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि अधिकारियों की लापरवाही और जानकारी का अभाव आरटीआई अधिनियम के पारदर्शिता के उद्देश्य को कमजोर कर रहा है।
आयुक्त ने बताया कि आयोग में आए मामलों के विश्लेषण से यह सामने आया है कि करीब 75 प्रतिशत मामलों में सूचना केवल आयोग के हस्तक्षेप के बाद ही उपलब्ध कराई गई। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में 50 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि अभी भी करीब 20 हजार प्रकरण लंबित हैं। जिलों में तैनात अधिकारियों द्वारा समय पर सूचना उपलब्ध कराने में रुचि न लेना बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है।
बैठक के दौरान अधिकारियों की अज्ञानता भी उजागर हुई। जब आयुक्त ने 100 से अधिक पीआईओ से अपील और शिकायत के बीच अंतर पूछा, तो अधिकांश अधिकारी इसका जवाब नहीं दे सके। इसके अलावा कई अधिकारियों को वर्ष 2019 में हुए महत्वपूर्ण संशोधनों की जानकारी भी नहीं थी। ‘डीम्ड पीआईओ’ और सूचना के अंतरण (धारा 6(3)) जैसे तकनीकी प्रावधानों को लेकर भी अधिकारी अनभिज्ञ पाए गए।
पीलीभीत जिले की स्थिति पर चर्चा करते हुए मोहम्मद नदीम ने बताया कि यहां वर्तमान में 58 मामले लंबित हैं। वहीं लापरवाही बरतने के आरोप में अब तक 143 जन सूचना अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि कई अधिकारी बिना आवश्यक रिकॉर्ड के बैठक में पहुंचे, जिससे समीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हुई।
आयुक्त ने आरटीआई अधिनियम के तहत ‘सुओ मोटो डिस्क्लोजर’ (स्व-प्रकाशन) की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा कि विभागों की वेबसाइटों पर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि आरटीआई अधिनियम जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पीलीभीत में सोमवार को गांधी सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के क्रियान्वयन को लेकर गहरी नाराजगी जताई।
बैठक में जन सूचना अधिकारियों (PIO) के कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि अधिकारियों की लापरवाही और जानकारी का अभाव आरटीआई अधिनियम के पारदर्शिता के उद्देश्य को कमजोर कर रहा है।
आयुक्त ने बताया कि आयोग में आए मामलों के विश्लेषण से यह सामने आया है कि करीब 75 प्रतिशत मामलों में सूचना केवल आयोग के हस्तक्षेप के बाद ही उपलब्ध कराई गई। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में 50 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि अभी भी करीब 20 हजार प्रकरण लंबित हैं। जिलों में तैनात अधिकारियों द्वारा समय पर सूचना उपलब्ध कराने में रुचि न लेना बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है।
बैठक के दौरान अधिकारियों की अज्ञानता भी उजागर हुई। जब आयुक्त ने 100 से अधिक पीआईओ से अपील और शिकायत के बीच अंतर पूछा, तो अधिकांश अधिकारी इसका जवाब नहीं दे सके। इसके अलावा कई अधिकारियों को वर्ष 2019 में हुए महत्वपूर्ण संशोधनों की जानकारी भी नहीं थी। ‘डीम्ड पीआईओ’ और सूचना के अंतरण (धारा 6(3)) जैसे तकनीकी प्रावधानों को लेकर भी अधिकारी अनभिज्ञ पाए गए।
पीलीभीत जिले की स्थिति पर चर्चा करते हुए मोहम्मद नदीम ने बताया कि यहां वर्तमान में 58 मामले लंबित हैं। वहीं लापरवाही बरतने के आरोप में अब तक 143 जन सूचना अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि कई अधिकारी बिना आवश्यक रिकॉर्ड के बैठक में पहुंचे, जिससे समीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हुई।
आयुक्त ने आरटीआई अधिनियम के तहत ‘सुओ मोटो डिस्क्लोजर’ (स्व-प्रकाशन) की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा कि विभागों की वेबसाइटों पर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि आरटीआई अधिनियम जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

