ETV Bharat: Dehradun: Friday, 6th March 2026.
जनगणना की रिपोर्ट जारी की जाती है तो उस दौरान एग्रीगेटर लेवल पर ही जानकारी डिस्क्लोज की जाती हैं.
उत्तराखंड में 25 अप्रैल से शुरू होने जा रहे जनगणना के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं गणना की जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा. खास बात यह है कि इस पूरी जनगणना की जानकारी कोई भी व्यक्ति आरटीआई के जरिए नहीं ले सकेगा. इसके अलावा, जनगणना से संबंधित जानकारियां पुलिस और न्यायालय में बतौर साक्ष्य नहीं दिया जा सकता है. ये जनगणना पूरी तरह से डिजिटल तरीके से होनी है. जिसके चलते इसकी सिक्योरिटी पर विशेष जोर दिया गया है.
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में जनगणना के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं गणना के कार्य की अधिसूचना जारी कर दी है. अधिसूचना के तहत, प्रदेश में 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक मकान सूचीकरण एवं गणना का कार्य संपन्न कराया जाएगा. उससे 15 दिन पहले यानी 9 अप्रैल से 24 अप्रैल तक जनता को स्वागणना की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. जिसके मद्देनजर जनगणना कार्य निदेशालय की ओर से तैयारी तेज कर दी गई है. जनगणना के दौरान एक बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जनगणना की जानकारियां सार्वजनिक हो जाएगी, क्योंकि जातिगत जनगणना किया जाना है.
जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा जनगणना एक्ट के तहत जनगणना के दौरान जो भी जानकारियां एकत्र की जाती हैं उसको पुलिस या न्यायालय में साक्ष्य के रूप में नहीं दिया जा सकता है. इसके साथ ही जनगणना की जानकारियां आरटीआई के अंतर्गत भी नहीं आती हैं. इसके अलावा, जनगणना के दौरान गणना कार्य में लगे कर्मचारी यानी इन्यूमेरेटर्स, किसी भी तरह की जानकारी को डिस्क्लोज नहीं कर सकते हैं. लिहाजा जनगणना के दौरान जो भी जानकारियां एकत्र की जाती हैं उन सभी को गुप्त रखा जाता है. उन्होंने बताया जब जनगणना की रिपोर्ट जारी की जाती है तो उस दौरान एग्रीगेटर लेवल पर ही जानकारी डिस्क्लोज की जाती है. यानी किसी भी वार्ड में किस-किस नाम के व्यक्ति रह रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिलेगी, बल्कि यह जानकारी मिलेगी कि संबंधित वार्ड में कितने व्यक्ति निवास करते हैं. इसी तरह किसी भी वार्ड में कितने बच्चे हैं, किस उम्र के हैं, स्कूल जा रहे हैं या नहीं जा रहे हैं, इसकी जानकारी मिल सकती है, लेकिन किसी बच्चे के पेरेंट्स कौन हैं? वो बच्चा किस स्कूल में जा रहा है? इस तरह की जानकारियां उपलब्ध नहीं होंगी.
ईवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा जनगणना का काम पूरी तरह से डिजिटल तरीके से होना है. ऐसे में डेटा सुरक्षित रखने के लिए एंड टू एंड इंक्रिप्शन की प्रक्रिया अपनाई गई है. साल 2021 में जब जनगणना शुरू होने की संभावना जताई गई थी उस दौरान से ही डेटा को पूरी तरह से सुरक्षित रखने की कार्रवाई चल रही थी. जनगणना कार्य देरी से शुरू होने के पीछे एक मुख्य वजह ये भी है.
जनगणना की रिपोर्ट जारी की जाती है तो उस दौरान एग्रीगेटर लेवल पर ही जानकारी डिस्क्लोज की जाती हैं.
उत्तराखंड में 25 अप्रैल से शुरू होने जा रहे जनगणना के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं गणना की जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा. खास बात यह है कि इस पूरी जनगणना की जानकारी कोई भी व्यक्ति आरटीआई के जरिए नहीं ले सकेगा. इसके अलावा, जनगणना से संबंधित जानकारियां पुलिस और न्यायालय में बतौर साक्ष्य नहीं दिया जा सकता है. ये जनगणना पूरी तरह से डिजिटल तरीके से होनी है. जिसके चलते इसकी सिक्योरिटी पर विशेष जोर दिया गया है.
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में जनगणना के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं गणना के कार्य की अधिसूचना जारी कर दी है. अधिसूचना के तहत, प्रदेश में 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक मकान सूचीकरण एवं गणना का कार्य संपन्न कराया जाएगा. उससे 15 दिन पहले यानी 9 अप्रैल से 24 अप्रैल तक जनता को स्वागणना की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. जिसके मद्देनजर जनगणना कार्य निदेशालय की ओर से तैयारी तेज कर दी गई है. जनगणना के दौरान एक बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जनगणना की जानकारियां सार्वजनिक हो जाएगी, क्योंकि जातिगत जनगणना किया जाना है.
जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा जनगणना एक्ट के तहत जनगणना के दौरान जो भी जानकारियां एकत्र की जाती हैं उसको पुलिस या न्यायालय में साक्ष्य के रूप में नहीं दिया जा सकता है. इसके साथ ही जनगणना की जानकारियां आरटीआई के अंतर्गत भी नहीं आती हैं. इसके अलावा, जनगणना के दौरान गणना कार्य में लगे कर्मचारी यानी इन्यूमेरेटर्स, किसी भी तरह की जानकारी को डिस्क्लोज नहीं कर सकते हैं. लिहाजा जनगणना के दौरान जो भी जानकारियां एकत्र की जाती हैं उन सभी को गुप्त रखा जाता है. उन्होंने बताया जब जनगणना की रिपोर्ट जारी की जाती है तो उस दौरान एग्रीगेटर लेवल पर ही जानकारी डिस्क्लोज की जाती है. यानी किसी भी वार्ड में किस-किस नाम के व्यक्ति रह रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिलेगी, बल्कि यह जानकारी मिलेगी कि संबंधित वार्ड में कितने व्यक्ति निवास करते हैं. इसी तरह किसी भी वार्ड में कितने बच्चे हैं, किस उम्र के हैं, स्कूल जा रहे हैं या नहीं जा रहे हैं, इसकी जानकारी मिल सकती है, लेकिन किसी बच्चे के पेरेंट्स कौन हैं? वो बच्चा किस स्कूल में जा रहा है? इस तरह की जानकारियां उपलब्ध नहीं होंगी.
ईवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा जनगणना का काम पूरी तरह से डिजिटल तरीके से होना है. ऐसे में डेटा सुरक्षित रखने के लिए एंड टू एंड इंक्रिप्शन की प्रक्रिया अपनाई गई है. साल 2021 में जब जनगणना शुरू होने की संभावना जताई गई थी उस दौरान से ही डेटा को पूरी तरह से सुरक्षित रखने की कार्रवाई चल रही थी. जनगणना कार्य देरी से शुरू होने के पीछे एक मुख्य वजह ये भी है.

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