Wednesday, March 18, 2026

पत्नी भरण-पोषण की कार्यवाही के लिए RTI Act के तहत पति का IT रिटर्न नहीं मांग सकती, यह 'निजी जानकारी' के तहत छूट प्राप्त है: कर्नाटक हाईकोर्ट

Live Law: Karnataka: Wednesday, 18 March 2026.
कर्नाटक हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कोई भी जीवनसाथी
, दूसरे जीवनसाथी का इनकम टैक्स रिटर्न और वित्तीय रिकॉर्ड, सूचना का अधिकार (RTI) एक्ट, 2005 के तहत आवेदन करके प्राप्त नहीं कर सकता; क्योंकि ऐसी जानकारी RTI Act की धारा 8(1)(j) के तहत 'निजी जानकारी' मानी जाती है, जिसे सार्वजनिक करने से छूट प्राप्त है।
बेंगलुरु में बैठी पीठ ने अदालत के आदेश में यह टिप्पणी करते हुए गिरीश रामचंद्र देशपांडे बनाम CIC, 2012 AIR SCW 5865 मामले का हवाला दिया,
"...किसी व्यक्ति द्वारा अपने इनकम टैक्स रिटर्न में दी गई जानकारी निजी जानकारी होती है, जिसे RTI Act की धारा 8(1) के खंड (j) के तहत सार्वजनिक करने से छूट प्राप्त है, जब तक कि कोई बड़ा जनहित साबित न हो जाए... 'बड़ा जनहित' शब्द का अर्थ ऐसा हित है, जो विवाद में शामिल पक्षों से परे हो और जिसका संबंध आम जनता या उसके किसी बड़े हिस्से से हो। भरण-पोषण से जुड़ा कोई व्यक्तिगत विवाद... मुख्य रूप से जीवनसाथियों के बीच का एक निजी मामला ही रहता है।"
हालांकि, जस्टिस सूरज गोविंदराज ने आगे स्पष्ट किया कि जिन अदालतों में भरण-पोषण की कार्यवाही चल रही है, वे संबंधित पक्षों की वित्तीय क्षमता का निष्पक्ष आकलन करने के लिए इनकम टैक्स विभाग से संबंधित दस्तावेज तलब कर सकती हैं।
हालांकि अदालत ने यह माना कि RTI आवेदन के माध्यम से केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) से आय का विवरण प्राप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह 'बड़े जनहित' की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। फिर भी भरण-पोषण के दावों के संबंध में जीवनसाथी उन दस्तावेजों को अदालत में पेश करवाने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटा सकता है।
जज ने आदेश के साथ संलग्न परिशिष्ट में यह बात कही,
"...अदालत [भरण-पोषण मामलों की अदालतें] केवल मौखिक बयानों या आय के संबंध में बिना पुष्टि वाले दावों के आधार पर भरण-पोषण की राशि तय नहीं करेंगी। यदि किसी भी पक्ष की आय को लेकर विवाद है, तो अदालत स्वतः संज्ञान लेते हुए अपनी शक्तियों का प्रयोग करके दस्तावेजी साक्ष्य तलब कर सकती है, जिसमें इनकम टैक्स रिटर्न और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड शामिल हैं..."
उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने याचिका आंशिक रूप से स्वीकार किया और पत्नी को यह स्वतंत्रता दी कि वह भरण-पोषण के मामले की सुनवाई कर रही अदालत में जाकर अपने पति के वित्तीय रिकॉर्ड का आकलन करने का अनुरोध कर सकती है। आयकर विभाग को IT Act, 1961 की धारा 138 के तहत भरण-पोषण न्यायालय के समक्ष वित्तीय दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की आवश्यकता होने की संभावना है।
हाईकोर्ट ने पति या पत्नी में से किसी के भी वित्तीय अभिलेखों के संबंध में 'प्रस्तुतीकरण आदेश' (Production Orders) के लिए आवेदन करने हेतु विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए।
Case Title: Income Tax Officer and CPIO v. Smt. Gulsanober Bano Zafar Ali Ansari and another