Dainik Bhaskar: Dhar: Monday, 15 December 2025.
मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने RTI अधिनियम की अनदेखी और गंभीर लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई करते हुए आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बरमंडल के प्रबंधक पर 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। खास बात यह है कि किसी सोसायटी प्रबंधक पर RTI मामले में इस स्तर की कार्रवाई प्रदेश में पहली बार हुई है।
यह मामला RTI कार्यकर्ता श्रीराम मारू द्वारा मांगी गई जानकारी से शुरू हुआ था। समिति के लोक सूचना अधिकारी—यानी प्रबंधक—ने न सिर्फ तय समय-सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई, बल्कि प्रथम अपील में भी सुनवाई नहीं हुई। मामला जब राज्य सूचना आयोग पहुंचा, तो यहां भी आदेश का पालन नहीं किया गया। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अपीलकर्ता को निशुल्क सूचना दी जाए, लेकिन प्रबंधक ने इसे भी नजरअंदाज कर दिया।
फर्जी साइन कर पत्र जमा किया
जांच आगे बढ़ी तो कहानी और चौंकाने वाली निकली। आयोग की सुनवाई में खुलासा हुआ कि प्रबंधक ने अपीलकर्ता के फर्जी हस्ताक्षर कर एक संतुष्टि पत्र जमा कराया था, ताकि मामला बंद हो सके। हस्ताक्षर मिलान में यह चाल पकड़ी गई, और आयोग ने इसे गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए प्रबंधक के सभी तर्कों को खारिज कर दिया।
1 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई में आयोग ने दोनों प्रकरणों में कुल 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। जुर्माने की राशि एक माह के भीतर जमा कर संबंधित जानकारी सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक संस्थाएं, भोपाल को भेजना अनिवार्य किया गया है। साथ ही प्रबंधक की सेवा पुस्तिका में भी इस कार्रवाई का उल्लेख दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को दी चेतावनी
प्रथम अपीलीय अधिकारी को भी आयोग ने कड़ी चेतावनी दी है कि आगे से ऐसे मामलों का समय पर और नियमों के अनुसार निराकरण किया जाए, अन्यथा उन्हें भी अनुशासनात्मक दंड का सामना करना पड़ेगा।
RTI कार्यकर्ता श्रीराम मारू का कहना है कि वे पिछले 11 वर्षों
से सोसायटियों से जुड़ी जानकारी जनहित में मांगते आ रहे हैं, लेकिन
विभाग अक्सर इसे RTI के दायरे से बाहर बताकर जानकारी देने से बचता रहा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्रवाई के बाद अब आम लोगों को भी सोसायटियों से
पारदर्शी जानकारी मिलने का रास्ता आसान होगा।
मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने RTI अधिनियम की अनदेखी और गंभीर लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई करते हुए आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बरमंडल के प्रबंधक पर 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। खास बात यह है कि किसी सोसायटी प्रबंधक पर RTI मामले में इस स्तर की कार्रवाई प्रदेश में पहली बार हुई है।
यह मामला RTI कार्यकर्ता श्रीराम मारू द्वारा मांगी गई जानकारी से शुरू हुआ था। समिति के लोक सूचना अधिकारी—यानी प्रबंधक—ने न सिर्फ तय समय-सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई, बल्कि प्रथम अपील में भी सुनवाई नहीं हुई। मामला जब राज्य सूचना आयोग पहुंचा, तो यहां भी आदेश का पालन नहीं किया गया। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अपीलकर्ता को निशुल्क सूचना दी जाए, लेकिन प्रबंधक ने इसे भी नजरअंदाज कर दिया।
फर्जी साइन कर पत्र जमा किया
जांच आगे बढ़ी तो कहानी और चौंकाने वाली निकली। आयोग की सुनवाई में खुलासा हुआ कि प्रबंधक ने अपीलकर्ता के फर्जी हस्ताक्षर कर एक संतुष्टि पत्र जमा कराया था, ताकि मामला बंद हो सके। हस्ताक्षर मिलान में यह चाल पकड़ी गई, और आयोग ने इसे गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए प्रबंधक के सभी तर्कों को खारिज कर दिया।
1 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई में आयोग ने दोनों प्रकरणों में कुल 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। जुर्माने की राशि एक माह के भीतर जमा कर संबंधित जानकारी सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक संस्थाएं, भोपाल को भेजना अनिवार्य किया गया है। साथ ही प्रबंधक की सेवा पुस्तिका में भी इस कार्रवाई का उल्लेख दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को दी चेतावनी
प्रथम अपीलीय अधिकारी को भी आयोग ने कड़ी चेतावनी दी है कि आगे से ऐसे मामलों का समय पर और नियमों के अनुसार निराकरण किया जाए, अन्यथा उन्हें भी अनुशासनात्मक दंड का सामना करना पड़ेगा।
