Aaj Tak: New Delhi: Monday, 25 August 2025.
चुनाव आयोग ने मतदान
केन्द्रों में लगे CCTV फुटेज
की रिटेंशन अवधि घटाकर 45 दिन तक सीमित
करने के अपने फैसले से जुड़ी जानकारी साझा करने को तैयार हो गया है. आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले
के बाद वह वजह को स्पष्ट करेगा. यह जवाब इंडिया टुडे द्वारा दायर RTI आवेदन के तहत मिला.
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर बीते कुछ दिनों में कई बड़े आरोप लगाए और बीजेपी के साथ मिलीभगत का भी आरोप लगाया. उन्होंनेन्हों नेआयोग के उस नियम पर सवाल उठाया था, जिसमें मतदान केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज को मतदान के 45 दिनों बाद को नष्ट कर दिया जाता है.
इंडिया टुडे ने सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए चुनाव आयोग से CCTV फुटेज के 45 दिन वाले नियम को लेकर जानकारियां मांगी थी. जिसे चुनाव आयोग ने देने से पहले तो इंकार कर दिया था लेकिन अब राजी हो गया है.
चुनाव आयोग की प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने इंडिया टुडे की अपील पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय जनसूचना अधिकारी (CPIO) के रुख को बरकरार रखा है.
अपीलीय प्राधिकारी का आदेश:
अधिकारियों ने कहा कि उन्होंनेन्हों नेमूल आरटीआई आवेदन और उस पर सीपीआईओ की प्रतिक्रिया की जांच की है. सीपीआईओ ने अपने जवाब में कहा था कि आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी वर्तमान में माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. ऐसे में फिलहाल जानकारी साझा नहीं की जा सकती.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्भरता:
हालांकि, अपीलीय प्राधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे ही सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगा, सीपीआईओ को उपलब्ध प्रासंगिक जानकारी आवेदक को प्रदान करनी होगी.
बता दें कि चुनाव आयोग (EC) ने कहा था कि वह मतदान केंद्रों की CCTV फुटेज को सिर्फ 45 दिन तक सुरक्षित रखने के अपने फैसले पर कोई भी जानकारी साझा नहीं करेगा. आयोग ने तर्क दिया कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला:
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर इस नियम को लेकर कई बार सवाल उठाए हैं. उन्होंनेन्हों नेआरोप लगाया था, 'चुनाव आयोग कह रहा है कि वह सीसीटीवी फुटेज को नष्ट कर देंगे. यह हमें चौंका चौं ने वाला लगा क्योंकिक्यों महाराष्ट्र में सवाल उठे थे कि शाम 5:30 बजे के बाद अचानक बड़ी संख्या में वोटिंग दिखी. लेकिन हमारे कार्यकर्ताओं ने बताया कि बूथ पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. इससे हमें यकीन हुआ कि चुनाव आयोग बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव चोरी कर रहा है.'
RTI
के जरिए क्या जानकारियां
मांगी गईं थी?:
राहुल गांधी की ओर से
चुनाव आयोग पर लगाए गए इन गंभीर आरोपों के बाद इंडिया टुडे ने RTI के जरिए चुनाव आयोग से तीन
महत्वपूर्ण सूचनाएं मांगी थीं.
चुनाव आयोग ने आरटीआई के
जरिए मांगी गई जानकारियों को देने से साफ इंकार करते हुए कहा, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में
लंबित है. डब्ल्यूपी (सी) संक्या 182025 जयराम रमेश बनाम भारत सरकार. इसलिए जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती.'
![]() |
CCTV फुटेज को लेकर RTI में मांगी गई जानकारियों को EC ने देने से किया इंकार (File Photo: PTI) |
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर बीते कुछ दिनों में कई बड़े आरोप लगाए और बीजेपी के साथ मिलीभगत का भी आरोप लगाया. उन्होंनेन्हों नेआयोग के उस नियम पर सवाल उठाया था, जिसमें मतदान केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज को मतदान के 45 दिनों बाद को नष्ट कर दिया जाता है.
इंडिया टुडे ने सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए चुनाव आयोग से CCTV फुटेज के 45 दिन वाले नियम को लेकर जानकारियां मांगी थी. जिसे चुनाव आयोग ने देने से पहले तो इंकार कर दिया था लेकिन अब राजी हो गया है.
चुनाव आयोग की प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने इंडिया टुडे की अपील पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय जनसूचना अधिकारी (CPIO) के रुख को बरकरार रखा है.
अपीलीय प्राधिकारी का आदेश:
अधिकारियों ने कहा कि उन्होंनेन्हों नेमूल आरटीआई आवेदन और उस पर सीपीआईओ की प्रतिक्रिया की जांच की है. सीपीआईओ ने अपने जवाब में कहा था कि आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी वर्तमान में माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. ऐसे में फिलहाल जानकारी साझा नहीं की जा सकती.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्भरता:
हालांकि, अपीलीय प्राधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे ही सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगा, सीपीआईओ को उपलब्ध प्रासंगिक जानकारी आवेदक को प्रदान करनी होगी.
बता दें कि चुनाव आयोग (EC) ने कहा था कि वह मतदान केंद्रों की CCTV फुटेज को सिर्फ 45 दिन तक सुरक्षित रखने के अपने फैसले पर कोई भी जानकारी साझा नहीं करेगा. आयोग ने तर्क दिया कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला:
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर इस नियम को लेकर कई बार सवाल उठाए हैं. उन्होंनेन्हों नेआरोप लगाया था, 'चुनाव आयोग कह रहा है कि वह सीसीटीवी फुटेज को नष्ट कर देंगे. यह हमें चौंका चौं ने वाला लगा क्योंकिक्यों महाराष्ट्र में सवाल उठे थे कि शाम 5:30 बजे के बाद अचानक बड़ी संख्या में वोटिंग दिखी. लेकिन हमारे कार्यकर्ताओं ने बताया कि बूथ पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. इससे हमें यकीन हुआ कि चुनाव आयोग बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव चोरी कर रहा है.'
- चुनाव आयोग ऐसे किसी
अध्ययन या रिपोर्ट को लेकर जानकारी साझा करे जिसकी सिफारिश पर 30 मई, 2025 को सीसीटीवी फुटेज को महज 45 दिन तक रखने का फैसला लिया गया.
- पूरी फाइल, जिसमें सभी आंतरिक फाइल नोटिंग, साथ ही वीडियो फुटेज रिटेंशन गाइडलाइन्स के संशोधन से
संबंधित कॉरेस्पॉन्डेंस शामिल है.
- चुनावी फुटेज के सोशल
मीडिया पर दुरुपयोग से जुड़ा कोई आकलन, यदि
मौजूद हो.