रॉयल बुलेटिन: मुझफ्फर नगर : मंगलवार : मार्च २०, २०१८.
जफ्फरनगर। राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने आज जिला पंचायत सभागार में बैठक लेते हुए जनपद मुजफ्फरनगर के समस्त जन सूचना अधिकारी व अपीलीय अधिकारियों की जन सूचना अधिकार 2005 सम्बन्धी समस्याओं/शंकाओं का निस्तारण किया। उन्होंने अधिकारियों केा सम्बोधित करते हुए कहा कि सूचना का अधिकार गरीबों व कमजोर लोगों के लिए मजबूत हथियार है इसी एक्ट के तहत ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है। सूचना आयुक्त ने कहा कि कुछ लोग इस एक्ट का गलत इस्तेमाल भी करते हैं, परन्तु प्रताडित करने वाले आवेदन पत्रों की अलग से पहचान हो जाती है। सूचना आयुक्त ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिये कि वह अपने विभाग में नाम की पट्टी या एक बोर्ड पर जन सूचना अधिकारी व अपीलीय अधिकारी का नाम व टेलीपफोन नम्बर तथा मिलने का समय अवश्य लिखवायें, ताकि आम जनता को इसके बारे में पूरी विस्तृत जानकारी प्राप्त हो सके तथा उनसे सम्पर्क किया जा सके।
हाफिज उस्मान राज्य सूचना आयुक्त उ.प्र. आज जिला पंचायत सभाकक्ष में जन सूचना अधिकारियों व अपीलीय अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। उन्होंने उपस्थित जन सूचना अधिकारियों को सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 एक्ट से सम्बन्धित नियमों आदि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि क्या, क्यों, कैसे व प्राईवेट एवं पर्सनल स्तर की सूचना को जनसूचना अधिकारी खारिज कर सकता है। उन्होंने कहा कि आवेदकों को सही समय पर सही तरीके से सूचना दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के अनुसार 500 शब्दों से अधिक सूचना नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई सूचना के अधिकार मंे 20 वर्ष से पुरानी सूचना मांगता है, तो नियम के तहत यह सूचना नहीं दी जा सकती।
उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार में मांगी गई सूचना स्पष्ट होनी होनी चाहिए। उन्होनें कहा कि कई बार ऐसा होता है कि सूचना आपसे सम्बन्धित नहीं है, ऐसे प्रार्थना पत्रों को 5 दिन के अन्दर सम्बन्धित विभाग के एक्ट की धारा 6(3) के अन्तर्गत अन्तरित कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कल 20 मार्च को जिला पंचायत सभागार में वादों की सुनवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि अगर वादी जन सूचना अधिकारी से सूचना प्राप्त न होने पर सीधे आयोग में प्रार्थना पत्र देकर सूचना मांगता है और आयोग जन सूचना अधिकारी को नोटिस जारी करता है, तो जन सूचना अधिकारी आयोग के समक्ष उपस्थित होकर यह बता सकता है कि वादी द्वारा प्रथम अपील नहीं की गई है। प्रथम अपील के बिना ही सीधे आयोग में प्रार्थना पत्रा दिया है, ऐसी स्थिति में आयेाग वादी का प्रार्थना पत्रा निरस्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि जन सूचना अधिकारी सूचना का सम्बन्ध उच्चाधिकारी से होने की स्थिति में एक्ट की धारा 5 (4) व 5 (5) के अन्तर्गत नोटिस देकर उच्चाधिकारी को पत्रा प्रेषित करे तथा इसकी सूचना आयोग में अवश्य दे। उन्होने कहा कि अगर वादी एक या दो विभागों की सूचना एक ही प्रार्थना पत्रा पर मांगता है, तो जन सूचना अधिकारी प्रार्थना पत्र निरस्त कर सकते है। उन्होंने बताया कि अप्रैल से वादों की सुनवाई वीडियों कान्फ्रेसिंग के जरिये किये जाने की जाने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसकी शुरूआत सहारनपुर से 5 अप्रैल से की जायेगी।
उन्होंने बताया कि 5 अप्रैल, 12 अप्रैल, 19 अप्रैल व 26 अप्रैल को सहारनपुर के वादो की सुनवाई वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिये की जायेगी। जिलाधिकारी राजीव शर्मा ने कहा कि जनपद के समस्त जन सूचना अधिकारी व अपीलीय अधिकारी सुबह 10 बजे पहंुचकर सर्वप्रथम जनसूचना में प्राप्त आवेदनों/प्रार्थना पत्रों से सम्बन्धित रजिस्टर देखे। जिलाधिकारी ने कहा कि हर अधिकारी अपने कार्यालय का रिकार्ड दुरूस्त रखें। उन्होंने कहा कि यदि कार्यालय का रिकार्ड ठीक होगा, तो आरटीआई का जवाब देने में कोई दिक्कत नहीं आयेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी व अधिकारी जनता का सेवक समझकर कार्य का निस्तारण करेंगे, तो आरटीआई की नौबत नहीं आयेगी। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनन्त देव तिवारी, मुख्य चिकित्साधिकारी पीएस मिश्रा, अपर जिलाधिकारी वि/रा सियाराम मौर्य, अपर जिलाधिकारी प्रशासन हरीशचन्द्र, सहित सभी विभागों के जनसूचना अधिकारी, अपीलीय अधिकारी एवं समस्त विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।