नवभारत टाइम्स: कोलकाता: Sunday,
March 11, 2018.
आरटीआई
के तहत रांगफल डिनायल के लिए पश्चिम बंगाल में हैं कम से कम 43 साल इंतजार का इंतजार करना पड़ेगा। इसके बाद ही शायद
समस्या का निपटारा हो सके। यानी अगर आज आप कोई आरटीआई पश्चिम बंगाल में लगाते हैं
तो उसका निपटारा 2061 से पहले होने की उम्मीद नहीं
है। जी हां, एक स्टडी में यह चौंकाने वाले
तथ्य सामने आए हैं जो बताते हैं कि देश में सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) की
वर्तमान स्थिति कितनी दयनीय है और सरकारें इसके प्रति कितनी उदासीन हैं।
सतर्क
नागरिक संगठन और सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज की तरफ से देश के विभिन्न राज्यों में
आरटीआई की स्थिति को लेकर यह संयुक्त स्टडी की गई है। इस स्टडी के मुताबिक पश्चिम
बंगाल में फिलहाल सिर्फ दो सूचना आयुक्त हैं। स्टडी में यह बात सामने आई है कि
पिछले वर्षों में सिर्फ एक सूचना आयुक्त होने के कारण करीब 12 महीने किसी आरटीआई पर कोई सुनवाई ही नहीं हुई।
ओडिशा
में भी स्थिति अच्छी नहीं
पश्चिम
बंगाल की तरह ही केरल की भी स्थिति है। केरल में अगर आप आज आरटीआई के तहत कोई
सूचना चाहते हैं तो करीब 6 साल तक आपको इंतजार करना पड़
सकता है। ओडिशा में भी स्थिति अच्छी नहीं है। वहां भी आरटीआई के तहत जवाब के लिए 5 साल से अधिक इंतजार करना पड़ जाएगा। और इस दयनीय
स्थिति के पीछे जो सबसे बड़ी वजह है वह है कि इन सभी प्रदेशों में सूचना आयुक्तों
की बड़ी संख्या में कमी।
आंध्र
प्रदेश में आरटीआई की स्थिति और भी दयनीय है। यहां का सूचना आयोग आंध्र प्रदेश और
तेलंगाना दोनों राज्यों के लिए काम करता है। मई 2017
में मुख्य सूचना आयुक्त और एक सूचना आयुक्त के रिटायर होने के बाद से ही यहां का
सूचना आयोग मृतप्राय स्थिति में है।
आम
आदमी को मजबूत करने के लिए बने इस कानून की स्थिति राज्यों में इतनी कमजोर कर दी
गई है कि ज्यादातर मामले पेंडिंग पड़े हुए हैं। सूचना का जवाब मिलना तो दूर आवेदन
की वापसी के आंकड़े ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं। सबसे अधिक मामले तो केंद्रीय
सूचना आयोग की तरफ से लौटाए गए हैं। इसके बाद गुजरात, असम और उत्तराखंड हैं, जहां
मामलों को निपटाने की जगह लौटाने की संख्या अधिक है।