Thursday, April 09, 2015

डिजिटल इंडिया में RTI के जवाब तक नहीं मिलते!

आईबीएन-7: नई दिल्‍ली: Thursday, 09 April 2015.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही डिजि‍टल इंडिया का सपना देख रहे हों, लेकिन देश के कई राज्‍य फिलहाल सरकारी महकमे की डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया से कोसो दूर नजर आते हैं। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्र सरकार की अपील के बाद भी महाराष्‍ट्र को छोड़ किसी भी राज्‍य ने आरटीआई के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू नहीं की है। बता दें कि केंद्र सरकार ने राज्‍य सचिवालय में और देश के सभी राज्‍यों के मंत्रालयों, विभागों में 1 अप्रैल 2015 से ऑनलाइन आरटीआई सुविधा शुरू करने की बात कही थी, लेकिन महाराष्‍ट्र को छोड़ फिलहाल किसी भी राज्‍य की वेबसाइट अस्तित्‍व में नजर नहीं आती है। गौर करने वाली बात है कि आरटीआई कानून के अस्तित्‍व में आने 9 साल बाद केंद्र सरकार ने ऑनलाइन आरटीआई की सुविधा शुरू की थी, लेकिन राज्‍यों के पास तो यह सुविधा अब तक नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
इससे पहले इस मामले में मध्‍य प्रदेश के हरदा जिले के वकील राजीव अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की थी, जिसमें उन्‍होंने सूचना के अधिकार के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक सुविधाओं को शुरू करने की अपील की थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में न्‍यायाधीश एचएल दत्तु और एके सीकरी की पीठ ने 3-11-2014 को केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से इस मामले पर 3 हफ्ते के अंदर जवाब पर मांगा था, और बाद में केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2015 से सभी राज्यों के विभागों द्वारा आरटीआई ऑनलाइन किए जाने की बात कही थी, लेकिन महाराष्ट्र को छोड़ इस पर सभी राज्यों ने बेरुखी दिखाई।
जनहित याचिकाकर्ता असंतुष्‍ट
उधर इस मामले में जनहितयाचिका कर्ता रा‍जीव अग्रवाल का कहना है कि उन्‍हें इस बात की निराशा है कि महाराष्‍ट्र को छोड़ अब तक कोई भी राज्‍य इस पर गंभीर नहीं है। हालांकि राजीव का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश, उत्‍तराखंड, पंजाब, मध्‍य प्रदेश ने ऑनलाइन आरटीआई की सुविधा देने की बात कही है, लेकिन कब? इस पर यह सरकारें मौन हैं। इसके अलावा राजीव ऑनलाइन पोर्टल के कई फीचर्स से भी असंतुष्‍ट हैं। वे कहते हैं कि पोर्टल में याचिकाकर्ता को जवाब प्राप्‍त करने की सुविधा नहीं है, और न ही जब सूचना के आवेदन को एक विभाग से दूसरे विभाग ट्रांसफर किए जाने की सुविधा है। ऐसा न होने से आवेदनकर्ता को फिर भटकना पड़ेगा।
अब लड़ेंगे कॉल सेंटर की लड़ाई
राजीव अग्रवाल का कहना है कि भारत की बहुसंख्‍यक आबादी इस समय इंटरनेट का प्रयोग नहीं करती है ऐसे में ग्रामीण इलाकों और कस्‍बों की अनपढ़ आबादी के लिए राज्‍यों में आरटीआई कॉल सेंटर होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि वे अगली जनहित याचिका में कॉलसेंटर के लिए अपील करेंगे। राजीव के अनुसार देश में फिलहाल बिहार ऐसा राज्‍य है, जहां फोन पर आरटीआई दाखिल की जा सकती है।
महाराष्‍ट्र बना पहला राज्‍य
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महाराष्‍ट्र देश का ऐसा पहला राज्‍य बन गया है, जहां राज्‍य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने आरटीआई पोर्टल की शुरुआत है। महाराष्‍ट्र के नागरिक अब राज्‍य सरकार के किन्‍हीं भी विभागों से https://rtionline.maharashtra.gov.in पर लॉग इन कर सूचना प्राप्‍त कर सकते हैं। हालांकि यह वेबसाइट अभी पूरी तरह डेवलप नहीं हो पाई है, लेकिन ऐसे प्रयास जनता के अधिकारों को लेकर सरकार की गंभीरता दिखाते हैं।