News18:
Jaipur: Monday, 23 February 2015.
अधिकारी
10
और कर्मचारी महज 24। ये हालात हैं प्रदेश में
सूचना का अधिकार अधिनियम कि पालना सुनिश्चित करवाने वाले राज्य सूचना आयोग के।
राजस्थान राज्य सूचना आयोग कर्मचारियों की भारी तंगी से जूझ रहा है।
आयोग
में अधिकारियों के अनुपात में कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है। कर्मचारियों की
कमी के चलते राज्य में सूचना का अधिकार अधिनियम की समयबद्ध क्रियान्विति बाधित हो
रही है।
अव्यवस्थाओं
का आलम ये है कि जिन 24 कर्मचारियों की यहां बात की
जा रही है उनमें से भी 14 सेवानिवृत्ति के बाद अपनी
सेवाएं दे रहे हैं, जबकि 2
कार्मिक संविदा पर काम कर रहे हैं। स्थायी कर्मचारियों के नाम पर आयोग में महज 8
कार्मिक कार्यरत हैं।
अन्दाजा
लगाया जा सकता है कि प्रदेश में सूचना का अधिकार अधिनियम का क्या हश्र होगा। आयोग
में कर्मचारियों की कमी के चलते परिवादियों को आयोग से न्याय नसीब होने में
अनावश्यक देरी हो रही है।
हालात
ये हैं कि आयोग में परिवाद प्राप्त होने के बाद उसे रजिस्टर होने में ही 3
से 4 माह का वक्त लग रहा है। वहीं, परिवादियों
को पहला नोटिस जारी होने के लिए 6-7 महीने और पहली सुनवाई के लिए
करीब 2 साल का इन्तजार करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों
की कमी के साथ ही सूचना आयुक्तों की कमी भी इस देरी के लिए जिम्मेदार है। आयोग तक
पहुंचने वाले कई मामलों में तो हालात ये होते हैं कि जब तक परिवादी को सूचना
प्राप्त होती है, उसके लिए उस सूचना की उपयोगिता की समाप्त हो चुकी होती है।
आयोग
में कर्मचारियों की कमी का आलम यह है कि जितनी संख्या में मुख्य सूचना आयुक्त और
सूचना आयुक्त फैंसले लेते हैं, उतनी संख्या में फैंसलों को
टाइप करने के लिए ऑॅपरेटर भी मौजूद नहीं है।
कर्मचारियों
पर काम का बोझ इतना ज्यादा है कि दूसरे विभागों से कर्मचारी आयोग में
प्रतिनियुक्ति पर आने से कतराते हैं। एक ओर कर्मचारियों पर जहां काम का बोझ हावी
है। दूसरी ओर आयोग में कुछ अधिकारियों के पास काम महज नाम मात्र का ही है।