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Dunia: Merath: Tuesday, 14 October 2014.
अगर
आप व्यवस्था में भ्रष्टाचार की फैली जड़ को उखाड़ने के लिए सूचना अधिकार अधिनियम
(आरटीआई) को एक सशक्त हथियार समझते हैं तो अपनी सोच बदल लें। आरटीआई के तहत सूचना
देने में लेटलतीफी और हीलाहवाली तो आम है,
लेकिन अब सूचना मांगने
वाले को रद्दी दी जा रही है। बेसिक शिक्षा विभाग ने फर्जी नियुक्ति मामले में
आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी देने में तीन माह लगाए।
इसके
बाद भी सूचना की जगह करीब ढाई किलो रद्दी थमा दी गई। मामले की शिकायत मुजफ्फरनगर
के जिलाधिकारी से की गई है। मुजफ्फरनगर जिले के खंड शिक्षा अधिकारी से मेरठ के
रक्षापुरम के निवासी नरेंद्र कुमार सिंघल (70)
ने सूचना के अधिकार
अधिनियम के तहत प्राथमिक विद्यालय शहबाजपुर तिगाई खतौली, मुजफ्फरनगर के एक सहायक अध्यापिका के विषय में सूचना
मांगी थी।
शिक्षिका
के फर्जी तरीके से नियुक्ति का मामला बताया गया था। जानकारी की प्रमाणित छाया
प्रतियों को उपलब्ध कराने के लिए एक हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट भी संलग्न किया।
नरेंद्र कुमार उस समय दंग रह गए,
जब उन्हें सूचना की जगह
दो किलो 400 ग्राम वजन का मोटा रजिस्टर्ड
लिफाफा मिला और उसमें प्राइवेट कॉलेजों को पंफलेट व अन्य रद्दी कागज मिले।