नवभारत
टाइम्स: नई
दिल्ली: Thursday, 09 October 2014.
भारत
सरकार दिल्ली में सांसदों के लग्जरी अस्थाई आवासों पर हर महीने लाखों रुपए का खर्च
कर रही है। सांसदों को अस्थाई आवास के नाम पर लग्जरी सुविधाओं वाले स्वीट उपलब्ध
कराए हैं। 16 मई 2014 को 16वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित
हुए कई सांसदों को 17 मई से ही दिल्ली के पांच
सितारा होटलों में अस्थाई आवास दिया गया है,
जिनपर काफी राशि खर्च की
जा रही है। मध्यप्रदेश के नीमच से जानेमाने आरटीआई कार्यकर्ता चंद्र शेखर गौड़ ने
यह जानकारी हासिल की है।
सांसदों
को होटलों में अस्थाई ठिकाने के तौर पर लग्जरी स्वीट दिए गए हैं। इन अस्थाई आवासों
का प्रति दिन का किराया 6000 से लेकर 7000 रुपए तक है। इस तरह से एक सांसद पर प्रतिमाह 1 लाख 80 हजार रुपए से लेकर 2 लाख 10 हजार रुपए तक केवल किराए के
मद में खर्च किया जा रहा है। किराए के अतिरिक्त इस राशि में 12.36 प्रतिशत सर्विस टैक्स और 5 प्रतिशत लग्जरी टैक्स भी जोड़ने पर यह खर्च ढाई लाख
रुपए महीने तक पहुंच जा रहा है। हालांकि अभी भी इसमें भोजन, टैक्सी और लॉन्ड्री का खर्च शामिल नहीं है।
आरटीआई
से मिली जानकारी के अनुसार 17 मई 2014 से ही सांसदों को अस्थाई आवास के तौर पर होटलों में
ठहराया गया है। सांसदों को आईटीडीसी के सम्राट होटल, जनपथ
और अशोक होटल में ठहराने की व्यवस्था की गई है। हालांकि सभी निर्वाचित सांसदों को
होटलों में नहीं ठहराया गया है। कुछ सांसदों को आवास आवंटित हो चुके हैं और कुछ को
अपने राज्यों के भवनों में ठहराया गया है। आरटीआई से जो जानकारी मिली है उसके
हिसाब से 15 अगस्त तक अभी इस मद में किसी
भी प्रकार की राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
सूत्रों
का कहना है कि सांसदों को होटलों में ठहराने के पीछे कई कारण हैं। इसमें सबसे अहम
कारण लुटियंस जोन के सांसद आवासों का खाली न होना और रखरखाव फिर से किए जाने में
लगने वाला समय है। लुटियंस जोन में एक बार जिनको आवास आवंटित हो जा रहे हैं वह
जल्द इसे खाली नहीं कर रहे हैं। खाली आवासों के फिर मेंटनेंस में भी समय लग रहा
है। सांसद अपने लिए आवंटित आवास में प्रवेश करने से पहले शुभ मुहुर्त भी देख रहे
हैं। इन सब वजहों की वजह से सरकारी आवास में सांसदों का प्रवेश लंबित हो जा रहा
है।
