Monday, July 07, 2014

आरटीआई की आड़ में मचा रखी खुली लूट

Patrika: Indore: Monday, 07 July 2014.
कलेक्टोरेट में आरटीआई यानी सूचना के अधिकार का फॉर्म लेने में ही खुली लूट-खसोट हो रही है। बाबुओं की बाहर बैठने वाले दुकानदारों से ऎसी सेटिंग है कि आवेदन फॉर्म से लेकर स्टाम्प तक, हर जगह आवेदकों की जेब पर डाका पड़ रहा है। हैरानी तो यह है कि यह सब आला अफसरों की नाक के नीचे हो रहा है।
कलेक्टोरेट को आईएसओ सर्टिफिकेट मिल गया, मगर यहां आने वाले लोगों की परेशानी खत्म नहीं हुई। बाबुओं ने कमाई का हर रास्ता इतने बेहतर तरीके से निकाल रखा है कि लाख कोशिशों के बाद भी इन पर कोई अंकुश नहीं है। आरटीआई एक्ट सरकारी तंत्र की खामियों, अधिकारों और योजनाओं को जानने का एक बेहतर उपाय है, जिसके जरिए नौकरशाही पर काफी हद तक अंकुश भी लगा है। इसमें शासन ने आवेदकों को प्राथमिकता दी है, मगर कलेक्टोरेट में बाबू अपने तरीके से चला रहे हैं।
हर मामले में जरूरी:
आवेदन लेने से लेकर जानकारी देने तक, हर मामले में इनकी कृपादृष्टि जरूरी है। इसके बाद जेब भी ढीली करना जरूरी बन गया है। कलेक्टोरेट के किसी भी विभाग में न तो इसके फॉर्म हैं और न ही शुल्क की रसीद काटी जाती है। आवेदन के लिए कोई भी पहुंचे उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता, कि फलां दुकान पर फॉर्म मिलेगा, फलां स्थान पर 10 रूपए का स्टाम्प मिलेगा। दोनों लेकर आओ तो ही आवेदन लिया जा सकेगा। इधर, बाहर वाले दुकानदारों ने खुलेआम लूट मचा रखी है।
10 रूपए में फॉर्म 20 में स्टाम्प:
बाहर फोटोकॉपी की कई दुकानें हैं, इनमें से कुछ को शायद आरटीआई का ठेका दिया गया है। तभी तो यहां फॉर्म की कीमत 10 रूपए है, चौंक गए न। यह हकीकत है, गेट के ठीक सामने एक दुकान पर जब पूछा गया तो दुकानदार का जवाब था कि फॉर्म ही 10 रूपए का आएगा, स्टाम्प अलग से, जबकि आवेदन शुल्क 10 रूपए है। दुकानदार से पूछा गया कि फॉर्म इतना महंगा क्यों तो उसका जवाब था कि कम्प्यूटर से तैयार होता है इसलिए। खैर, पास की एक और दुकान पर पूछा गया, तो उसने 2 रूपए में फॉर्म दे दिया। अब बारी आई स्टाम्प की। कई स्टाम्प वेंडर से 10 रूपए का स्टाम्प मांगा, स्टॉक की कमी का कहकर किसी ने 15 तो किसी ने 20 रूपए बताए।
आरटीआई डेस्क ले सकती है शुल्क:
आरटीआई एक्ट में नियम है कि आवेदन फॉर्म मुफ्त में दिया जाए और यदि आवेदक चाहे तो शुल्क की रसीद डेस्क पर काटनी होगी। दरअसल, शुल्क के रूप में तीन विकल्प हैं, स्टाम्प, पोस्टल ऑर्डर और रसीद। कलेक्टोरेट में स्टाम्प को ही अनिवार्य कर रखा है। यहां स्टाम्प कीमत से ज्यादा में बेचे जा रहे हैं और इसमें इन बाबुओं का कमीशन भी फिक्स है।