Thursday, March 06, 2014

रसूखदारों को चुभते हैं आरटीआइ एक्टिविस्ट

दैनिक जागरण: श्रावस्ती: Thursday, March 06, 2014.
जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005(आरटीआइ) जहां लोकतंत्र के लिए वरदान है वहीं मध्य प्रदेश के भोपाल से यूपी के श्रावस्ती तक हुई घटनाएं आरटीआइ एक्टिविस्ट के लिए खतरे का इशारा भी करती हैं। चार दिन पूर्व इकौना के लालबोझी में एक आरटीआइ कार्यकर्ता की हत्या की घटना ने कई गंभीर मामलों से पर्दा उठाया है। ये वह मामले हैं जिनमें या तो आरटीआइ एक्टिविस्ट की हत्या कर दी गई या रसूखदारों ने सीधे धमकियां दी हैं या फिर उन्हें जेल भेजवाने के कुचक्र रचे हैं। श्रावस्ती और बहराइच की घटनाएं साफ बता रही हैं कि घोटालों की परतें खोलने वाली सूचनाएं मुहैया कराने में अफसर और उनके रसूखदार बाबू किस तरह की पेशबंदियां करते हैं।
ये घटनाएं खोल रहीं पोल;
केस एक - 28 फरवरी को देर शाम थाना इकौना के लालबोझी गांव के बढ़ईपुरवा गांव में आरटीआइ के तहत सूचना मांगने वाले जाकिर को गोली से उड़ा दिया गया। प्रधान पति समेत पांच लोगों को हत्या में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
केस दो - विकास क्षेत्र गिलौला के नेवरिया गांव पंचायत के पूर्व प्रधान पुत्तीलाल ने जब गांव में कराए गए विकास कार्यो के संबंध में आरटीआइ के तहत सूचना मांगी और शिकायत की तो उन्हें प्रधान पति और समर्थकों ने पहले मारापीटा। बाद में सोनवा थाने में उनके विरुद्ध लूट, गाली गलौज और जानमाल की धमकी का मुकदमा दर्ज करवा दिया।
केस तीन- भिनगा हनुमानगढ़ी मुहल्ला निवासी शशिकांत तिवारी कई विभागों से जनसूचना अधिकार 2005 के तहत एक वर्ष में लगभग सौ सूचनाएं मांग चुके हैं। इनमें से सूचनाएं तो कम धमकी ज्यादा मिली।
केस चार- विकास क्षेत्र इकौना के कटरा बाजार निवासी अधिवक्ता पवन श्रीवास्तव ने जब गांव पंचायत के विकास कार्यो की जानकारी आरटीआइ के तहत मांगी तो उन्हें ग्राम पंचायत सचिव, प्रधान व उनके पति की ओर से जानमाल की धमकी दी जा रही है।
सूचना मांगने की प्रक्रिया ;
श्रावस्ती : आरटीआइ कानून के तहत कोई भी व्यक्ति किसी सरकारी विभाग के मनोनीति अधिकारी के समक्ष दस रुपये के शुल्क के साथ आवेदन कर सकता है। इसके बाद सूचना 30 दिन के अंदर मुहैया कराई जाती है।
30 दिन में सूचना महज छलावा:
श्रावस्ती : सूचना का अधिकार लागू हुए कई साल बीत गए हैं लेकिन निर्धारित 30 दिन की समय सीमा में सूचना हासिल करना आसान नहीं है। भिनगा नगर के हनुमानगढ़ी मुहल्ला निवासी शशिकांत तिवारी बताते हैं कि एक वर्ष में उनकी ओर से लगभग सौ सूचनाएं मांगी गई। इनमें से सिर्फ उन्हें 20 सूचनाएं ही मिल सकी हैं। उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद भी जानकारी मुहैया नहीं कराई जाती है।
मुहैया कराई जाएगी सुरक्षा: एडीएम
श्रावस्ती : एडीएम रजनीश चंद्र का कहना है कि आरटीआइ कार्यकर्ता को धमकी देने या फर्जी मुकदमों में फंसाने की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो कार्यकर्ता को एसडीएम व सीओ को सूचित करना चाहिए। एक सामान्य व्यक्ति को भी यदि कोई धमकी दे रहा है तो उसे निश्चित सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। एडीएम कहते हैं कि आरटीआइ के तहत 30 दिनों के अंदर सूचना देना होता है। यदि कोई विभाग इसे पूरा नहीं करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 30 दिन में सूचना न मिलने पर अपीलीय अधिकारी के यहां अपील की जा सकती है।