Friday, September 27, 2013

यहां महाराष्ट्र-गुजरात से ज्यादा होती है RTI कार्यकर्ताओं की हत्या,पढ़ें सच्चाई!

दैनिक भास्कर: पटना: Friday, September 27, 2013.
बिहार में सूचना के अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है। महाराष्ट्र और गुजरात में भी आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, लेकिन बिहार इस मामले में सबसे अव्वल है। यहां बीते कुछ सालों में पांच कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है। यह काफी चिंता का विषय है। ये बातें बुधवार को रमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय ने कही।
उन्होंने कहा कि राज्य में आरटीआई कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमलों का सबसे बड़ा कारण राज्य में भ्रष्टाचार और राजनीतिक अपराधीकरण की अधिकता है। वे सूचना के जन अधिकार के राष्ट्रीय अभियान के तहत आयोजित बिहार राज्य सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का विषय कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमले पर जन-सुनवाईरखी गई थी। इसमें आरटीआई एक्टिविस्ट रूपेश, महेन्द्र यादव, निवेदिता सहित कई लोग शामिल हुए।
एक फीसदी कर रहे उपयोग : सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय ने कहा कि आरटीआई का उपयोग राज्य में एक फीसदी से भी कम लोग कर रहे हैं। कम सूचना मांगने वाले लोगों के कारण ही अधिकारी सूचना देने में आना-कानी करते है और उन्हें प्रताड़ित करते हैं। इसके अलावा आरटीआई के बारे में जागरूकता का अभाव भी है।
आरटीआई कार्यकर्ता जिन्हें मारा गया:
1.शशिधर मिश्रा - बेगूसराय, 2. रामविलास सिंह - लखीसराय, 3. डॉ. मुरलीधर जायसवाल - हवेली खड़गपुर(मुंगेर), 4. राहुल कुमार - मुजफ्फरपुर, 5. राम कुमार ठाकुर - मुजफ्फरपुर।
एक बार में एक विषय का विरोध : पांडेय ने कहा कि राज्य में टेलीफोन पर सूचना मांगने की योजना पूरी तरह नाकामयाब हो चुकी है। टेलीफोन पर सूचना मांगने वालों को अक्सर नाउम्मीदी हाथ लगती है। टेलीफोन को होल्ड पर देर तक रखा जाता है। इसके अलावा सरकार ने एक बार में एक ही विषय पर सूचना मांगने का कानून कर रखा है। आरटीआई कार्यकर्ता इसका विरोध करते हैं।