दैनिक जागरण: अंबेडकरनगर: Saturday, September 28, 2013.
जन
सूचना अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन करने वालों को जवाब मिलने का इंतजार खत्म ही
नहीं होता। कारण अपनी गर्दन बचाने के लिए संबंधित विभाग सूचनाएं देने में आनाकानी
करते हैं। इससे विभागों में आरटीआइ के तहत पड़ी अर्जियों की फेहरिश्त बढ़ती जा रही
है।
सूचना
का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत राजस्व व अन्य विभागों
में कुल 493 आवेदन लंबित हैं। चालू वित्तीय
वर्ष में प्राप्त 527 प्रार्थना पत्रों में महज 34 आवेदकों को ही सूचनाएं उपलब्ध हो सकीं। सूचना उपलब्ध
कराने में तहसील मुख्यालय काफी पीछे है। तहसीलों में आरटीआइ की लंबी फेहरिश्त है।
इसी क्रम में अकबरपुर में 105,
टांडा में 86, जलालपुर में 42
तथा आलापुर तहसील में 72 प्रार्थना पत्र अवशेष हैं। जबकि शिकायत लिपिक के पास 78 प्रार्थना पत्र लंबित हैं। निर्धारित समय के भीतर
सूचनाएं न उपलब्ध होने से आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आलापुर
तहसील क्षेत्र के निकसपुर निवासी धर्मेद्र कुमार ने गत 10 जलाई को जिला विद्यालय निरीक्षक से सूचना मांगी थी, लेकिन अब तक उन्हें विभाग द्वारा सूचना नहीं उपलब्ध
करायी जा सकी। जलालपुर तहसील क्षेत्र के चितई पट्टी निवासी महेश कुमार ने गत छह
जुलाई को अपर मुख्य चिकित्साधिकारी से सूचना मांगी थी, लेकिन दो माह बाद भी सूचना नहीं दी गयी। समय से सूचना
न मिलने के चलते आवेदक अपने मकसद में जहां सफल नहीं हो पा रहे हैं, वहीं उन्हें जनसूचना आयोग की भी चौखट नापनी पड़ती है।
अपर जिलाधिकारी रामाश्रय का कहना है कि,
जनसूचना अधिकार अधिनियम
का अनुपालन करना जरूरी है। इसके लिए विभागों को निर्देश दिए गए हैं। सूचना न
उपलब्ध कराने वाले विभागाध्यक्षों को आयोग में जुर्माना भी अदा करना पड़ता है।