नवभारत
टाइम्स:
मुंबई: Wednesday, November
07, 2012.
सरकार
की बिगड़ी छवि सुधारने और डैमेज कंट्रोल करने के लिए आरटीआई के कानून में किए गए
संशोधन करने का इरादा छोड़ देने के केंद्र सरकार के फैसले से महाराष्ट्र के आरटीआई
कार्यकर्ता उत्साहित हैं और उन्होंने राज्य सरकार से भी ऐसा ही कदम शीघ्रातिशीघ्र
उठाने की मांग की है। सबका समवेत स्वर में यही कहना है कि केंद्र और राज्य में एक
ही पार्टी की नीत सरकार है और जब केंद्र ने आरटीआई की आत्मा को जीवित रखने वाले
प्रावधान को जिंदा रखा है तो राज्य सरकार इस कानून की हत्या क्यों कर रही है।
गौरतलब
है कि केंद्र सरकार के संशोधनों का वापस लेने का अर्थ यह है कि अब कोई भी नागरिक
राष्ट्रीय सुरक्षा , निजता एवं वाणिज्यिक हितों की
सुरक्षा से जुड़ी फाइल नोटिंग्स को छोड़कर सूचनाओं की मांग सकता है। संशोधन में
केवल सामाजिक एवं विकास से जुड़े फाइल नोटिंग्स से जुड़ी सूचनाएं देने का निर्देश
था। गौरतलब है कि इसी साल जनवरी महीने की 16 और 31 तारीख को सरकार ने चुपचाप आरटीआई के प्रावधान में
तीन बड़े संशोधन कर सबको चौंका दिया था। इसका पता मार्च महीने में तब चला जब
सरकारी इन्फॉर्मेशन ऑफिसर सूचना देने से अचानक मना करने लगे।
क्या
हैं तीन बड़े संशोधन.
1) आरटीआई के सवाल में सिर्फ एक
ही मुद्दे से संबंधित प्रश्न पूछे जाएं।
2) प्रश्नों को 150 शब्दों तक सीमित रखा जाए।
3) फाइलों का निरीक्षण करते समय
सिर्फ पेंसिल लेकर जाया जाए।