नवभारत
टाइम्स:
नई
दिल्ली:
Friday, November 02, 2012.
सरकार
ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून में संशोधन के विवादास्पद प्रस्ताव को वापस
लेने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की
बैठक में लिए गए इस फैसले का असर यह होगा कि आरटीआई ऐक्ट में फिलहाल कोई चेंज नहीं
होगा।
आरटीआई
ऐक्ट में संशोधन के इस मसौदे में कहा गया था कि सिर्फ सामाजिक और विकास से जुड़े
मुद्दों पर मांगी गई जानकारी के लिए फाइल में दर्ज टिप्पणियों को ही सार्वजनिक
किया जा सकेगा। लेकिन यह प्रस्ताव रद्द होने से अब पहले की तरह नैशनल सिक्युरिटी, प्रिवेसी और कमर्शल हितों में प्रोटेक्शन के मामलों
को छोड़कर, फाइलों में दी गईं अन्य
जानकारियां आईटीआई के जरिए हासिल की जा सकेंगी।
इससे
पहले, कैबिनेट ने 2006 में भी आरटीआई ऐक्ट में संशोधनों को मंजूरी दी थी, लेकिन तब भी कड़े विरोध की वजह से इन संशोधनों को
संसद में पेश नहीं किया गया था। अब संशोधन प्रस्ताव रद्द करने के सरकार के कदम से
साफ है कि पहले से ही अपने खिलाफ बने माहौल को देखते हुए सरकार कोई रिस्क नहीं
लेना चाहती।
माना
जा रहा है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए सरकार ने अपने कदम वापस खींचे
हैं। दरअसल, सरकार को यह चिंता थी कि अगर
यह प्रस्ताव पास हो जाता है तो इससे न सिर्फ आरटीआई ऐक्टिविस्ट बल्कि अन्य सामाजिक
संगठन भी इस मुद्दे पर सड़कों पर आ जाएंगे।