P7news.com: New Delhi: Wednesday, July 11, 2012.
कृषि मंत्रालय में चंपक क्यों? हम बात बच्चों की पत्रिका चंपक की कर रहे हैं जिसे खरीदने पर कृषि मंत्रालय मोटी रकम खर्च करता है।
अब ये तो मंत्रालय के बॉस ही बता सकते हैं कि आखिर बाबुओं को चंपक की जरूरत क्यों है। लेकिन एक RTI से इस बात का खुलासा भी हुआ है कि कृषि मंत्रालय में सिर्फ बाबू लोग 21 लाख की चाय पी जाते हैं।
जिस देश में आए दिन किसान खुदकुशी करते रहते हैं उसी देश की कृषि मंत्रालय में काम करने वाले बाबुओं की मुफ्तखोरी का आलम जानेंगे तो हैरान हो जाएंगे।
ये कृषि मंत्रालय में एक साल में पी गयी चाय और स्नैक्स के बिल का आंकड़ा है।
कोफ्त होगा जानकर कि 4 साल में कृषि मंत्रालय के बाबुओं ने 78 लाख 54 हजार रुपए की चाय और स्नैक्स डकार ली। हैरान हो जाएंगे जब सुनेंगे साल दर साल सरकारी बाबुओं ने कितना पैसा चाय और स्नैक्स पर उड़ा दिया।
जरा ध्यान फरमाइएगा इन आंकड़ों परः
2008 से 2009 में चाय और स्नैक्स में कृषि मंत्रालय के सरकारी बाबुओं ने कुल 19 लाख 28 हजार 526 रु. खर्च किया।
साल 2009 से 2010 में कृषि मंत्रालय के बाबुओं ने चाय और स्नैक्स पर 16 लाख 81 हजार 332 रु. खर्च कर दिए।
जबकि साल 2010 से 2011 में कृषि मंत्रालय के ही बाबुओं ने चाय और स्नैक्स पर 21लाख 74 हजार 098 रु. खर्च किए। वर्ष 2011 से 2012 तक मंत्रालय के बाबुओं ने 20 लाख 70 हजार 070 रु. सिर्फ चाय और स्नैक्स पर उड़ा दिए।
यानि कुल मिलाकर चार साल में 78 लाख 54 हजार रुपये सरकारी बाबुओं ने चाय और स्नैक्स पर ही उडा दिया
इतना ही नहीं कृषि मंत्रालय में मैंगजीन की खर्च की अगर बात करें तो वो भी कम हैरान करने वाला नहीं है। 2011 से 2012 तक मंत्रालय में 5 लाख 76 हजार 387 रु. की मैगजीन मंगायी गई है। हैरानी की तो बात ये है कि मंत्रालय में चंपक और नंदन जैसे बच्चों की मैगजीन भी मंगाई गई।
सवाल उठता है कि जिस मंत्रालय में सरकारी बाबु बैठते हैं वहां बच्चों की मैगजीन का क्या काम?
सवाल ये भी है कि जिस देश की आधी से ज्यादा आबादी गरीब है वहां सरकार का एक विभाग इतनी लापरवाही से कैसे खर्च कर सकता है?
क्या चाय और स्नैक्स पर लाखों रुपए डकारने की बात गले के नीचे हजम होती है?
सवाल कई हैं लिहाजा मंत्रालय को इसका जवाब भी देना होगा। लेकिन एक बात तय है कि सरकारी बाबुओं की इस मुफ्तखोरी की जानकारी शायद कभी दुनिया के सामने नहीं आ पाती?
लेकिन आर टी आई कार्यकर्ता अल्फराज आलम की बदौलत सरकारी बाबुओं की मुफ्तखोरी की तस्वीर अब सार्वजनिक है।