Tuesday, April 19, 2011

संपत्ति की घोषणा क्यों नहीं करना चाहते पूर्व प्रधान न्यायाधीश

दैनिक भास्कर ; राकेश भटनागर; 19 APRIL 2011,
नई दिल्ली. भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है, तो दूसरी ओर अब वे संपत्ति की घोषणा करने से पीछे हट गए हैं। उन्होंने कहा है कि इस सूचना से किसी का फायदा नहीं होने वाला। उन्होंने कहा कि उनकी और उनके परिवार की संपत्ति का खुलासा करना उनकी निजता का उल्लंघन होगा।
बालाकृष्णन ने आयकर विभाग को कहा है कि वह उनकी संपत्तियों का खुलासा न करें, क्योंकि उससे किसी भी तरह का लोक कल्याण नहीं होने वाला। बालाकृष्णन जब सीजेआई थे, तब उनके परिजन अपनी असंगत संपत्ति की वजह से आयकर विभाग की जांच के दायरे में आए थे। वह पहले सीजेआई हैं, जिनकी संपत्ति की जांच केरल पुलिस ने की।
आरटीआई आवेदनकर्ता टी. बालचंद्रन ने आयकर विभाग से बालाकृष्णन, उनके बेटे बी. प्रदीप, दोनों बेटियों सोनी और रानी, दामादों जे. बेनी और वी श्रीनिजन के साथ ही भाई भास्करन के खिलाफ की गई जांच की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही बालाकृष्णन के 2005-06 से 2009-10 तक के आयकर रिटर्न की सत्यापित प्रति भी मांगी गई है।
एक अन्य वकील मनोहरलाल शर्मा ने शीर्ष अदालत में बालाकृष्णन और उनके परिजनों के खिलाफ असंगत संपत्ति रखने के मामले में न्यायिक जांच करने की मांग करती याचिका दाखिल की है।
शर्मा की याचिका पर कोर्ट ने पहले दलित प्रधान न्यायाधीश बालाकृष्णन की संपत्ति के अंग्रेजी में अनुवादित आधिकारिक दस्तावेजों की प्रति तलब की है। यह दस्तावेज हासिल करने के बाद कोर्ट बालाकृष्णन एंड कंपनी की संपत्ति की सीबीआई जांच करने के आदेश जारी कर सकती है।