Wednesday, April 13, 2011

अन्ना से साथी हुए नाराज, नेताओं की बढ़ी उम्मीद.

दैनिक भास्कर ; APRIL 13,2011
नई दिल्ली. लोकपाल बिल को मजबूत बनाने और उसे तैयार करने के लिए बनाई गई समिति में जनता के नुमाइंदे शामिल करने के लिए केंद्र को अनशन के जरिए मजबूर करने वाले अन्ना हजारे से इनदिनों हर पार्टी और विचारधारा के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं। जो काम राजनीतिक पार्टियों को खुद करना चाहिए, उसके लिए ये पार्टियां ७२ साल के अन्ना हजारे से गुजारिश कर रही हैं। लेकिन गुजरात में ग्राम्य विकास के लिए मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करना हजारे के सहयोगियों और समर्थकों को नागवार गुजर रहा है। जन लोकपाल बिल पर अन्ना के समर्थन में अनशन पर बैठने वाली मल्लिका साराभाई ने भी मोदी की तारीफ करने पर हजारे की आलोचना की है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारे का समर्थन करने वाली मेधा पाटकर ने भी इस मुद्दे पर हजारे की आलोचना की है।
केंद्र की सत्ता में मौजूद कांग्रेस चाहती है कि अन्ना हजारे उत्तर प्रदेश में अपने आंदोलन की शुरुआत करें। पार्टी ने उत्तर प्रदेश को सबसे भ्रष्ट राज्य बताते हुए हजारे से कहा है कि अगर वह राज्यों से भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की शुरू कर रहे हैं तो वे इसकी शुरुआत यूपी से करें।
वहीं, मायावती के धुर विरोधी मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी भी अन्ना हजारे से उम्मीद लगाए बैठे है। पार्टी ने अन्ना हजारे से गुजारिश की है कि वे खुद उत्तर प्रदेश आएं और मायावती के भ्रष्टाचार को अपनी आंखों से देखें। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। नक्सलियों से कथित तौर पर सहानुभूति रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश भी चाहते हैं कि अन्ना हजारे नक्सली समस्या का हल खोजें। लेकिन निशाना बनाने से नहीं चूक रहीं पार्टियां
हर नेता को भ्रष्ट कहना लोकतंत्र की अवमानना : भाजपा
भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मंगलवार को अपने ब्लॉग में लिखा कि देश में बहुत से ईमानदार और समझदार नेता मौजूद हैं। हर नेता को भ्रष्ट करार देना लोकतंत्र की अवमानना है। जो लोग राजनीति और राजनेताओं के खिलाफ घृणा का माहौल बना रहे हैं, वे लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं। आडवाणी ने अन्ना के जन आंदोलन को सराहा, लेकिन इस समीक्षा को गलत बताया कि आंदोलन इसलिए सफल हुआ क्योंकि अन्ना ने राजनीतिक लोगों को किनारे ढकेल दिया। अपनी बात के समर्थन में उन्होंने लिखा- अगर ऐसा होता तो तथाकथित हजारे समर्थकों ने जब उमा भारती को धरने से लौटा दिया तो हजारे उनसे माफी न मांगते। माफी मांगना अन्ना की शालीनता है और इसका प्रतीक है कि सभी राजनेता भ्रष्टाचारी नहीं होते।
अन्ना के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं : उधर, मप्र भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा ने अन्ना के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि वे ईमानदारी का विश्वविद्यालय नहीं चलाते। राजनेताओं को उनके प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है।
आंदोलन का खर्च कहां से आया, जांच हो : कांग्रेस
लोकपाल पर हर मांग पर झुकने के बाद अब सरकार और कांग्रेस के निशाने पर अन्ना और उनके सहयोगी हैं। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि इसकी जांच होना चाहिए कि आंदोलन का खर्च किसने उठाया। उन्होंने हजारे पर निशाना साधते हुए कि चुनाव हर उस आदमी को लडऩा चाहिए जो राजनेताओं को गाली देता है। उन्होंने लोकपाल के दायरे में कॉर्पोरेट और स्वयंसेवी संगठनों को लाने की मांग की। सिब्बल का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा- यह सही है कि केवल लोकपाल से भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होगा। दिग्विजय ने आंदोलन को आरएसएस के समर्थन के सवाल पर सीधा जवाब नहीं दिया, पर कहा कि अन्ना और उनके सहयोगियों को इस पर मंथन करना चाहिए कि उनके साथ किन लोगों ने मंच साझा किया।
ऐसे नहीं बदलेगा सिस्टम : सपा के पूर्व महासचिव और राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने कहा कि क्या हजारे महात्मा गांधी, जेपी या गौतम बुद्ध से भी बड़े हैं, जो राजनेताओं को बुरा बता रहे हैं। केवल राजनेताओं को कोसने से देश का सिस्टम नहीं बदल सकता।