Friday, May 16, 2025

RTI Act की धारा 7 के तहत जांच शुरू करना पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर का कानूनी दायित्व नहीं: केरल हाईकोर्ट

 Live Law: Kerala: Friday, 16 May 2025.
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में दिए गए एक फैसले में  किया कि सूचना का अधिकार अधिनियम
2005 (RTI Act) की धारा 7 के तहत किसी पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (PIO) के पास RTI आवेदनों के निस्तारण के दौरान कोई जांच शु करने की शक्ति या कर्त नहीं है।
यह निर्णय जस्टिस एन. नागरेश ने याचिका पर सुनवाई करते ए दिया, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने प्राचार्य पद पर नियुक्ति को मंजूरी देने का निर्देश मांगा था।
याचिकाकर्ता को विधिवत चयन क्रिया और यूनिवर्सिटी की मंजूरी के बाद कॉलेज का प्राचार्य नियु किया गया था। बाद में यूनिवर्सिटी ने उस मंजूरी को वापस लेने और याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्रवाई शु करने का फैसला किया यह आरोप लगाकर कि जब वह कॉलेज में पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर थे तब उन्होंनेन्हों नेएक स्टूडेंट की डिग्री माणपत्रों की सता की जांच नहीं की, जब उस पर RTI आवेदन आए थे।
कोर्ट ने  किया,
जब याचिकाकर्ता पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर थे और उन्होंनेन्हों ने  RTI आवेदन प्रा किए तो उन्होंनेन्हों नेसूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अनुसार कार्य किया। RTI आवेदनों के निस्तारण में याचिकाकर्ता की ओर से कोई लापरवाही नहीं पाई गई। यह आरोप कि उन्हें आवेदन मिलने पर जांच
करनी चाहिए थी, स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकिक्यों न तो वह उस शिकायत से निपटने के लिए सम अधिकारी थे और न ही उनके पास किसी जाली दस्तावेज़ की कोई विशि शिकायत आई थी। इसलिए RTI Act की धारा 7 के तहत जांच शु करना उनका कानूनी कर्त नहीं था।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर मान भी लिया जाए कि कोई एकल घटना लापरवाही की थी, तब भी वह एक वैध चयन क्रिया के माम से की गई नियुक्ति को मंजूरी न देने का आधार नहीं बन सकती।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की अंतरिम आदेश के अनुसार की गई अस्थायी नियुक्ति को स्थायी मंजूरी दी जाए।
(केस टाइटल: डॉ. मुहद ताहा बनाम कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशक)