पी7 न्यूज: नई
दिल्ली: Sunday, April 14, 2013.
जिस
आरटीआई एक्ट की सरकार दुहाई देती है जनता के हाथ की उसी ताकत को नेता मानने को
तैयार नहीं हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट सुभाष अग्रवाल की याचिका पर संसदों ने अपनी
आमदनी का ब्योरा जाहिर करने से इनकार कर दिया है। ऐसा दोनों सदनों के सांसदों ने
किया है।
इसके
लिए जवाब में एथिक्स कमेटी के नियमों का हवाला दिया गया है। राज्यसभा ने सुभाष
अग्रवाल को जो जवाब दिया है उसके मुताबिक एथिक्स कमेटी वेबसाइट पर सांसदों की
आमदनी का ब्योरा डालने की सलाह नहीं देती है। हालांकि शपथ लेने के 90 दिनों के भीतर सभी सांसदों के लिए अपने परिवार की
संपति की तफ्सील देना ज़रूरी है।
जानकारों
की राय में चुनाव आयोग को यही ब्योरा देने वाले सांसद पार्लियामेंट को यह नहीं
बताते। ऐसा इसलिए है क्योंकि संसद को गलत ब्योरा देने से वो अयोग्य घोषित हो सकते
हैं जबकि नामांकन भरते वक्त गलत जानकारी देने पर उनके खिलाफ़ महज़ केस ही दाखिल
होता है। कुछ जानकारों की राय में सांसदों को यह डर भी सताता है कि आमदनी की
सही-सही जानकारी का इस्तेमाल उनके विरोधी कर सकते हैं।
आरटीआई
जवाब से यह भी साफ होता है कि मधु कोड़ा को भी जानकारी ना देने की छूट लोकसभा की
स्पीकर मीरा कुमार ने ही दी थी।