सहारा समय: नइदिल्ही : बृहस्पतिवार,
18 अप्रैल, 2013.
आरटीआई
कानून से प्राप्त जानकारी के अनुसार,
दवाओं के परीक्षण के
चक्कर में भारत में हर दो दिन में तीन लोगों की मौत हो रही है.
![]() |
| दवा परीक्षण में मौत पर औसत मुआवजा 2.63 लाख रूपये |
सूचना
के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार,
2010 में एक मामले में औषध
कंपनियों ने मुआवजे के तौर पर दी गई 1.50 लाख रूपये की राशि का भुगतान
इसलिए नहीं किया जा सका क्योंकि मृतकों के वैध उत्तराधिकारी का पता नहीं चल सका.
2010 में 22 मामलों में नौ कंपनियों ने 70.33 लाख रूपये का मुआवजा दिया. 2011 में औषध कंपनियों ने दवा परीक्षण के 16 मामलों में आठ कंपनियों ने 34.91 लाख रूपया मुआवजे के रूप में दिया.
स्वास्थ्य
सेवा महानिदेशालय की औषधि महानियंत्रक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दो वर्षो में 16 कंपनियों ने 38 मामलों में 1.05 करोड़ रूपये का मुआवजा दिया
जो औसतन 2.63 लाख रूपया आता है.
कहां
कितना मिला?
रिपोर्ट
के अनुसार, 2011 में नाइजीरिया में एक कंपनी
ने दवा परीक्षण के मामले में पीड़ित को 1,75,000 डालर मुआवजा दिया जबकि जर्मनी
में दवा परीक्षण के दौरान मौत होने पर 40 लाख यूरो दिया गया, वहीं अमेरिका में एक महिला को 30 लाख डालर मुआवजा दिया गया.
भारत
में दवा परीक्षण के संबंध में प्रभावी नियमन और पीड़ितों को मुआवजे के प्रावधान के
बारे में सरकार ने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम 1945
में और संशोधन किया है.
स्वास्थ्य
क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुआवजे के नियमों एवं
दिशानिर्देशों को और स्पष्ट करने की मांग की है ताकि आम लोगों को इसका फायदा मिल
सके.
रोहतक
स्थित आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष ने सूचना के अधिकार कानून के तहत औषधि महानियंत्रक
कार्यालय से दवा परीक्षण के दौरान पिछले कुछ वर्षो में होने वाली मौत और इस संबंध
में पीड़ितों को प्रदान किये गये मुआवजे की राशि के बारे में जानकारी मांगी थी.
औषधि
महानियंत्रक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दवा
परीक्षण के दौरान 2008 में 288 लोग,
2009 में 637, 2010 में 668,
2011 में 438 और जून 2012 तक 211 लोगों की मौत हुई है.
दवा
परीक्षण पर उच्चतम न्यायालय में मामला दायर करने वाली संस्था स्वास्थ्य अधिकार मंच
के अमूल्य निधि ने कहा कि सरकार ने दवा परीक्षण से पीड़ितों को राहत प्रदान करने
के लिए कानून में संशोधन किया है.
इसमें
कई अच्छी बात है लेकिन दिशानिर्देश को और अधिक स्पष्ट बनाये जाने की जरूरत है ताकि
आम लोगों को इसका फायदा मिल सके.
